मुंबई विश्वविद्यालय को ऑन स्क्रीन मूल्यांकन का दूसरा मौका

      मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने आज मुंबई विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करने का एक और मौका दिया  कि ग्रीष्मकालीन सेमेस्टर में ऑन स्क्रीन मार्किग (ओएसएम) तंत्र में उसे जिन तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा था,  उनसे इस वर्ष शीतकालीन सेमेस्टर में दोबारा सामना नहीं हो।   
       न्यायमूर्ति  बीआर गवई और न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की पीठ ने कहा कि विविद्यायल ने अच्छी तैयारी के बगैर ही तंत्र को लागू कर दिया। लेकिन अब हमें राज्य सरकार ने सूचित किया है कि गड़बड़ियों का पता लिया गया है और उन्हें सुधारने के लिए कदम उठाए गए हैं। अदालत ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि सरकार ने मामले में दखल दिया है और नए तंत्र की निगरानी कर रही है, हमारा मानना है कि विश्वविद्यालय को ओएसएम तंत्र लागू करने का दोबारा मौका देना उचित होगा।  
    विश्वविद्यालय को तंत्र के साथ समस्या आई थी और वह ग्रीष्मकालीन सेमेस्टर के परिणामों की घोषणा वक्त पर नहीं कर पाया जिसके बाद ये याचिकांए  उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थीं।  
       विविद्यालय के वकील रई रॉडिग्स ने अदालत को बताया कि इस सेमेस्टर के दिसंबर के मध्य में समाप्त हो जाने और परीक्षा परिणामों की घोषणा उसके 45 दिन बाद होने की उम्मीद है। इससे बाद पीठ ने मामले की सुनवाई 14 फरवरी के लिये निर्धारित कर दी।