छत्तीसगढ़ में एक लाख 80 हजार शिक्षाकर्मी हड़ताल पर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवा में संविलियन समेत कई मांगों को लेकर लगभग एक लाख 80 हजार शिक्षाकर्मी   हड़ताल पर चले गए है,जिससे कई हजार स्कूलों में तालाबंद हो गया है। 
    शिक्षाकर्मियों ने कल अपर मुख्य सचिव एम.के.राउत के साथ मैराथन बैठक तथा उसके बाद मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के साथ भी हुई मुलाकात में भी संविलियन पर कोई आासन नही मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया था। राज्यभर से मिली खबरों के अनुसार शिक्षाकर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण शासकीय स्कूलों में पढ़ाई आज लगभग ठप पड़ गई है। 
    राज्य में नियमित शिक्षकों की कई वर्षों से भर्ती नही होने के कारण कई हजार स्कूलों में पठन पाठन का पूरा दारोमदार शिक्षाकर्मियों के ऊपर है।बहुत कम स्कूल ही ऐसे है जहां कि एक दो नियमित शिक्षक बचे है। शिक्षाकर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण हजारों उन स्कूलों में जहां एक भी नियमित शिक्षक नही है वहां ताला भी नही खुला।एक दो नियमित शिक्षकों वाले जो स्कूल खुले भी है वहां ऊंची कक्षाओं के बच्चे निचली कक्षाओं के बच्चों के पढ़ाने की खबरे मिली है। 
   शासकीय सेवा में संविलियन की मांग शिक्षाकर्मी लम्बे अर्से से कर रहे है। लेकिन सरकार उनके वेतन में इजाफा आदि कर इस मांग को नकारती रही है। राज्य में अगले वर्ष के अन्त में चुनाव होने है इस कारण अपनी इस मुख्य मांग पर दवाब बनाने के लिए उन्होने फिर कमर कस ली है। शिक्षाकर्मियों के हड़ताल पर जाने से इस समय मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण समेत वह सभी दूसरे सरकारी काम भी ठप्प हो गए है जिनकों शिक्षण कार्य के अलावा पूरा करने का दायित्व उनके पास था।
       शिक्षाकर्मियों ने एक माह पहले ही शासकीय सेवा में संविलियन समेत कई मांगों को नही माने जाने पर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की नोटिस दे रखी थी,जिस पर सरकारी तां दो तीन दिन पहले ही बातचीत के लिए सक्रिय हुआ। शिक्षाकर्मियों के नेताओं के अनुसार मुख्यमंत्री ने सांतवे वेतनमान को देने समेत अन्य वित्तीय मांगों पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्क्षयता में बारे समिति बनाने की तो बात की लेकिन शासकीय सेवा में संविलियन के बारे में कुछ नही कहा। अपर मुख्य सचिव श्री राउत ने कहा कि सरकार उनकी कई मांगो मानने को तैयार है पर संविलियन की मांग नही मानी जा सकती।
      शिक्षाकर्मियों के नेताओं ने कहा कि सरकार अभी तक उनकी मांगों को लेकर 22 कमेटियों का गठन कर चुकी है पर अभी तक इनमें से एक ने भी ऐसी रिपोर्ट नही दी जिससे कि उनका कुछ भला हो सके। उनका कहना है कि उनके हड़ताल को दौरान ऐसी समितियां गठन कर उन्हे गुमराह किया जाता रहा है। उनका यह भी कहना है कि एक तो स्कूलों में नियमित शिक्षक है नही और जहां है भी वह उनकी अपेक्षा कहीं ज्यादा वेतन पाते है।समान काम के लिए समान वेतन के सिद्दान्त लागू करने की वह अर्से से मांग कर रहे है।
     राज्य में नियमित शिक्षकों के स्वीकृत 72 हजार से अधिक पद रिक्त है।इनकों भरने के लिए सरकार ने अभी तक कोई कदम नही उठाया है। राज्य में हाईस्कूल और हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्राचार्य के कुल 4318 पदों में 2277 पद रिक्त है।इसे लेकर समय समय पर सरकार की ¨खचाई भी होती रही है। राज्य में स्कूली शिक्षा एक तरह से शिक्षाकर्मियों के भरोसे चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में नियमित शिक्षकों के सभी पद उनका सेवानिवृति के साथ ही रिक्त हो जायेंगे।
     फिलहाल राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने शिक्षाकर्मियों को हड़ताल पर जाने की बजाय स्कूलों में पठन पाठन में जुटे रहने को कहा है। उन्होने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राज्य सरकार स्कूलों के बन्द होने पर मूकदर्शक नही बनी रहेगी और हड़ताली शिक्षाकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगी।