बिहार में शिक्षा की बदहाली के वित्त रहित शिक्षा नीति जिम्मेवार: कुशवाहा
 
पटना । केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने बिहार में शिक्षा की बदहाली के लिए वित्त रहित शिक्षा नीति को जिम्मेवार ठहराया और कहा कि सरकार की इस नीति का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। 
          राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कुशवाहा ने आज यहां के ऐतिहासिक गांधी मैदान पार्टी की ओर से आयोजित‘ शिक्षा सुधार संकल्प महासम्मेलन‘ को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार शिक्षा में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत हैं और इस दिशा में कई कदम उठाये जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक सा से पाठ्यक्रमों में कई तरह के परिवर्तन करने का काम किया जा रहा है । 
           श्री कुशवाहा ने कहा कि बिहार सरकार की शिक्षा नीति के कारण प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गिरावट आयी है जिसमें वित्तरहित शिक्षा इसका मुख्य कारण है । सरकार से अनुदान मिलने के कारण वित्तरहित विद्यालयों के शासी निकायों में एक विशेष लोगों का आधिपत्य रहता है और इसमें आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि शासी निकाय का आधिपत्य रहने के कारण स्कूल प्रबंधन मनमानी करता है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। 
 
 रालोसपा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार में पहले डिग्री लाओ नौकरी पाओ के आधार पर शिक्षकों की बहाली बगैर किसी मूल्यांकन के ही की जाती थी। कुछ ऐसे शिक्षक भी नियुक्त हुए हैं जिन्हें अपना पता भी ठीक से लिखना नहीं आता । उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों का मूल्यांकन होना चाहिए और उन्हें शैक्षणिक कायरें से मुक्त कर उनके लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए । बहाल हुए शिक्षकों का दोष नहीं बल्कि उस समय की सरकार की नीति का ही दोष है । 
           श्री कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अब स्वीकार कर लिया है कि शिक्षा के क्षेा में बिहार पिछड़ा हुआ है । लेकिन अब बिहार शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर सकेगा । उन्होंने कहा कि पिछले 37  वर्षों के दौरान प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी गिरावट आयी है । इसकी भरपाई तो कोई नहीं कर सकता , लेकिन अब इसे 37 माह में ठीक करना है। 
          केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि केन्द्र और बिहार में 27  वर्षों के बाद  एक पार्टी राजग की सरकार बनी है और अब बदली हुयी इस स्थिति का लाभ उठाना चाहिए, नहीं तो आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करने वाली । केन्द्र की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग करने में कमी नहीं करेगी लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को भी आगे आना होगा । 
कुशवाहा ने कहा कि सरकारी स्कूलों में चलाये जा रहे मध्यान भोजन योजना में शिक्षकों के लगे रहने से छात्रों की पढ़ायी पर असर पड़ता है। ऐसे शिक्षक छात्रों की पढ़ायी पर नहीं दे पाते । उन्होंने कहा कि इस योजना को स्कूलों में बंद तो नहीं किया जा सकता क्योंकि गरीब तबके के बच्चों के लिए यह आवश्यक है । उन्होंने कहा कि मध्यान भोजन की जवाबदेही से शिक्षकों को अलग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। 
          केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि समय पर बच्चों को पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध हो, इस पर भी ध्यान देने की जरुरत है । केन्द्रीय विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़कर छात्र 90 प्रतिशत तक अंक लाते हैं । यही व्यवस्था राज्यों में भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी ने सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे उनसे किताबें मंगवायें जिसे तत्काल उपलब्ध कराया जायेगा । 
         इससे पूर्व श्री कुशवाहा ने महासम्मेलन में आये लोगों को संकल्प दिलाया । संकल्प में कहा गया कि एक समय था जब विक्रमशिला एवं नालंदा जैसे शिक्षण केन्द्रों के कारण बिहार को ज्ञान की भूमि के रुप में देश ही नहीं दुनिया में प्रतिष्ठा प्राप्त थी और उस खोयी हुयी प्रतिष्ठा को वापस लाना है तो अपने शिक्षण संस्थानों को उच्चतम स्तर तक विकसित करना होगा । 
        इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि, सांसद राम कुमार शर्मा, विधान पाषर्द संजीव श्याम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी, पूर्व केन्द्रीय मंी दसई चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शंकर झा आजाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता फजल इमाम मलिक, पूर्व मंी भगवान सिंह कुशवाहा और युवा रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद कामरान ने भी सभा को संबोधित किया ।