50 प्रतिशत स्कूलों व उच्च शिक्षा में विद्यार्थियो को दी जायेगी व्यावसायिक शिक्षा  

 

 मात्र 2.4 प्रतिशत  कामगार ही व्यवसायिक व तकनीकी रूप से प्रशिक्षित 

 

नई दिल्ली।   

 देश में पिछले लगभग छह वर्ष से कौशल शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की ओर से किये जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद 15 से 59 वर्ष की उम्र के कामगारों में से मात्र 2.4 प्रतिशत लोग ही व्यवासयिक या तकनीकी रूप से प्रशिक्षित हैं। छात्रों को बचपन से ही व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करने के लिये अगले पांच वर्षो में 50 प्रतिशत स्कूलों व उच्च शिक्षा में छात्रों को व्यवसायिक शिक्षा प्रदान की जायेगी। 

केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की ओर से आज संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट 2020-21 में कहा गया है कि इस वर्ष  प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तीसरे चरण में  प्रवासी कामगारों सहित 8 लाख लोगों के प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। समीक्षा के अनुसार नई शिक्षा नीति- 2020 में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के औपचारिक शिक्षा के साथ एकीकरण किया जा रहा है। इसमें अगले पांच वर्ष में 50 प्रतिशत स्कूल और उच्च शिक्षा में विद्यार्थियो को व्यावसायिक शिक्षा का अवसर प्रदान करने का लक्ष्य है।

समीक्षा के अनुसार  15 से 59 वर्ष की उम्र के कामगारों में से केवल 2.4 प्रतिशत लोगो ने ही व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है और 8.9 प्रतिशत अन्य लोगो ने अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इन 8.9 प्रतिशत कामगारो में से 3.3 प्रतिशत ने कार्य के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त किया जबकि 2.5 प्रतिशत लोगों ने स्व-प्रशिक्षण लिया और 2.1 प्रतिशत लोगों को वंशानुगत प्रशिक्षण मिला तथा एक प्रतिशत लोगों ने अन्य सोतों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

जिन लोगों ने औपचारिक रूप से प्रशिक्षण प्राप्त किया है उनमें से अधिकतर महिलाओं और पुरु षों ने आईटी-आईटीअईएस का प्रशिक्षण ग्रहण किया है। इसके बाद पुरु षों में इलेक्ट्रिकल-ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रणनीतिक उत्पादन, ऑटो, कार्यालय और व्यवसाय से सम्बंधित पाठ्यक्रम चुने। महिलाओं में वस्त्र, हैंडलूम-परिधान, कार्यालय और व्यवसाय से सम्बंधित कार्य स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान के साथ-साथ बच्चों के पोषण और प्री-स्कूल क्रैच से सम्बंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। रिपोर्ट के अनुसार कौशल विकास के क्षेत्र में सुधार के के तहत  संयुक्त कौशल नियामक-राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद क गठन किया गया है तथा  अक्टूबर 2020 में पहली बार अधिक विसनीय रूप से प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिये दिशा निर्देश जारी किये गये। समीक्षा में कहा गया है कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार और पारदर्शिता के लिये ग्रेडिंग व्यवस्था की शुरु आत की गई है।