ग्रामीण विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी

 

गांवों में स्कूली विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन की संख्या 2018 में 36.5 प्रतिशत की तुलना में 2020 में बढकर 61.8 प्रतिशत हुई

 प्राथमिक स्कूल स्तर पर 96 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल

 ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिये  राज्यों को 818.17 करोड़ रु पये आवंटित

 9.72 लाख सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के भौतिक ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन

90.2 प्रतिशत विद्यालयो में बालिकाओं के लिये शौचालय व 95 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल

 

नई दिल्ली. 

 कोरोना महामारी ने वि के अन्य देशों के साथ साथ भारत में भी शिक्षा की तस्वीर बदल दी है और ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़े पैमाने पर आनलाइन शिक्षा का प्रयोग हुआ है। गांवों में शिक्षा के लिये 61.8 प्रतिशत छात्रों के पास स्मार्ट फोन है। बुनियादी सुविधाओं की दृष्टि से 9.72 लाख सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के भौतिक ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है जबकि 90.2 प्रतिशत विद्यालयो में बालिकाओं के लिये शौचालय व 95 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल है। 

देश में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचें तथा छात्र छात्राओं तक शिक्षा पहुंचाने का यह खुलासा केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2020-21 में किया है।   रिपोर्ट में कहा गया है कि  9.72 लाख सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के भौतिक ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। इनमें से 90.2 प्रतिशत विद्यालयो में बालिकाओं के लिये शौचालय और 93.7 प्रतिशत विद्यालयों में बालकों के लिये शौचालय की व्यवस्था है। 95.9 प्रतिशत स्?कूलों में पीने के पानी की सुविधा है।  82.1 प्रतिशत विद्यालयों में पीने, शौचालय और हाथ धोने के लिये पानी उपलब्ध है। 84.2 प्रतिशत स्कूलों में चिकित्सा जांच की सुविधा मौजूद है। 20.7 प्रतिशत स्कूलों में कम्प्यूटर और 67.4 प्रतिशत में बिजली का कनेक्शन और 74.2 प्रतिशत स्कूलो में रैम्प की सुविधा के साथ साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

 रिपोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में आये बदलाव का जिक्र करते हुए कहा गया है कि आनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिये केन्द्र सरकार ने राज्यों को 818.17 करोड़ रु पये आवंटित किये हैं । रिपोर्ट के अनुसार  ग्रामीण भारत में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में नामांकित विद्यार्थियो के पास स्मार्ट फोन की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज हुई है। 2018 में 36.5 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास ही स्मार्ट फोन थे, वहीं 2020 में 61.8 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन मौजूद थे।  समीक्षा में सलाह दी गई है कि उचित उपयोग किया गया तो शहरी और ग्रामीण, लैंगिक, उम्र और आय समूहो के बीच डिजिटल भेदभाव और शैक्षिक परिणाम में अंतर समाप्त होगा।

      रिपोर्ट के अनुसार  कोरोना के दौरान डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने महत्वपूर्ण पहल पीएम-ईविद्या की शुरु आत है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान  एनआईओएस) से सम्बंधित स्वयं मूक (एमओओसीअएस) के तहत लगभग 92 ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किये गये हैं और 1.5 करोड़ विद्यार्थियों ने अपना नामांकन कराया है। समग्र शिक्षा योजना के तहत शिक्षकों को ऑनलाइन अध्यापक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये 267.86 करोड़ रु पये जारी किये गये हैं।  

      समीक्षा के अनुसार, भारत ने प्राथमिक स्कूल स्तर पर 96 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल कर ली है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस) के अनुसार, अखिल भारतीय स्तर पर सात वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षरता दर 77.7 प्रतिशत है। हिंदू और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं सहित अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम है। समीक्षा रिपोर्ट में नई शिक्षा नीति 2020 लाने का जिक्र करते हुए कहा गय है कि  नई शिक्षा नीति का उद्देश्य देश में स्कूली और उच्च शिक्षा पण्राली में बडे परिवर्तनकारी सुधारों का मार्ग प्रशस्त करना है।