निशंक ने किया एनआईटी अरुणाचल में नई प्रयोगशाला का उदघाटन

 छात्रों के मन में वैज्ञानिक स्वभाव पैदा करें संस्थान: निशंक

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने आज यहाँ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) अरुणाचल प्रदेश के नव निर्मित यॉत्रिक अभियॉत्रिकी भवन, जैव-प्रौद्योगिकी एवं रासायन अभियॉत्रिकी भवन, केंद्रीय उपकरण सुविधा और प्रतिक्रिया अभियॉत्रिकी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के  मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री किरन रिजिजू, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे, अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री इंजीनियर ताबा तेदीर, एनआईटी अरुणाचल प्रदेश के निदेशक प्रोफ़ेसर पिनाकेश्वर महंत एवं एनआईटी अरुणाचल प्रदेश के अन्य शिक्षक भी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा जुड़े थे.

एनआईटी अरुणाचल प्रदेश का स्थायी परिसर ईटानगर से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व में जोटे में स्थित है, जिसका निर्माण कार्य पिछले कुछ वर्षों से रुका हुआ था. अब मंत्रालय द्वारा संशोधित लागत अनुमान को मंजूर किये जाने के पश्चात सभी कार्यकारी निकायों ने काम शुरू कर दिया है.

संस्थान के यॉत्रिक अभियॉत्रिकी भवन, जैव-प्रौद्योगिकी एवं रासायन अभियॉत्रिकी भवन का निर्माण 17.405 करोड़ रुपये प्रत्येक की लागत से पूरा किया गया है. इन सभी भवनों में 7,143 वर्ग मीटर का निर्माण क्षेत्र है. प्रत्येक नव निर्मित भवन में कुल 360 व्यक्तियों की क्षमता के सात अध्यापन कमरे, आभासी कक्षा कमरा सहित नौ प्रयोगशालाएं, एक सभागार और 27 संकाय सदस्य केबिन शामिल हैं.

संस्थान द्वारा केंद्रीय उपकरण सुविधा और प्रतिक्रिया अभियॉत्रिकी प्रयोगशाला का निर्माण अभी-अभी विश्व बैंक के टिक्युप-III वित्त से क्रमशः 0.35 करोड़ तथा 0.05 करोड़ की लागत से किया गया है. ये दोनों प्रयोगशालाएं अनुसंधान एवं परामर्श सेवाओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं.

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा, "एनआईटी अरुणाचल प्रदेश राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और इस प्रतिष्ठित संस्थान में सम्पुर्ण देश के छात्र अध्ययन कर रहे हैं. संस्थान ने यूपिया में अपने अस्थायी परिसर में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करते हुए, कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. प्रोफ़ेसर महंत के सक्षम नेतृत्व में इस संस्थान ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क-2020 में सभी भारतीय अभियॉत्रिकी तथा प्रौद्योगिकी संस्थानों में 200 वॉ स्थान प्राप्त किया है तथा मानव संसाधन विकास अभिनव कक्ष द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, केन्द्रीय विश्वविद्यालयों, केन्द्रीय वित्त पोषित अभियॉत्रिकी संस्थानों की उपलब्धियों पर अटल (एआरआईआईए) रैंक में भी उत्कर्ष स्थान प्राप्त किया है. अब जबकि इस संस्थान को स्थाई परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा मुझे पूरा विश्वास है कि यह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई चमत्कार कर सकता हैं."

इसके अलावा डॉ निशंक ने कहा कि हमारे शैक्षणिक संस्थानों, विशेष रूप से तकनीकी संस्थानों को अपने छात्रों के मन में एक वैज्ञानिक स्वभाव पैदा करना चाहिए. "हमारे संस्थानों को ज्ञान के "पिटारे" के रूप में काम करना चाहिए और युवा दिमाग को किताबी ज्ञान से परे सोचने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए. उनको किसी भी चुनौती को एक अवसर के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और कुल मिलाकर उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना चाहिए," उन्होनें आगे कहा.

डॉ निशंक ने कोरोना संकट काल में एनआईटी अरुणाचल प्रदेश द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा, "कोरोनावायरस के फैलने के एक महीने के भीतर ही एनआईटी अरुणाचल प्रदेश ने कम लागत वाली स्वचालित हस्त प्रक्षालक मशीन तथा जेल आधारित हस्त प्रक्षालक विकसित की. इसके अलावा यह संस्थान 53 संकाय सदस्यों के सहयोग से लगभग 800 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच.डी. स्तर की शिक्षा प्रदान कर रहा है. हाल ही में संस्थान में पीएच.डी. कार्यक्रम के नामांकन में 80% वृद्धि देखी गई है, जो निश्चित रूप से अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ानें में सहायक सिद्ध होगी. यह राष्ट्रीय महत्व का संस्थान पूरे उत्तर पूर्वी क्षेत्र में एक आदर्श है, जिसका मिशन "समाज की सेवा के लिए क्षेत्रीय, भारतीय तथा वैश्विक आवश्यकता की पहचान करना" है, जो कि बहुत ही सराहनिय मिशन माना जा सकता है. अपनें मिशन के तहत यह संस्थान समाज की सेवा के लिए युवाओं को प्रोत्साहित कर रहा है."

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने सभी को नई शिक्षा नीति के बारे में, उसकी नीति एवं कार्यान्वयन के बारे में सभी को बताया और कहा कि आज नए भारत के लिए हमारे लक्ष्य रोजगार सृजन, किसानों की आमदनी बढ़ाना, उन्नत भारत अभियान, स्किल इंडिया, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया आदि हैं. इन्हीं लक्ष्यों को ध्यान में रखते हमने प्राथमिक से लेकर उच्चतम स्तर की शिक्षा प्रणाली में बेहतरी के लिए नई शिक्षा नीति (एनईपी) लागू की है.