मातृभाषा में ज्ञान से आत्मनिर्भर होगा भारत: प्रो.आर.सी.कुहाड़

  • -हकेंवि में शोध, हरियाणा के सहयोग से दो दिवसीय वेबिनार का हुआ समापन
  • -सीबीएलयू के उपकुलपति प्रो.आर.के.मित्तल, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अश्वनी महाजन, भारतीय शिक्षण मंडल के डॉ. पुष्पेंद्र राठी, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो.तेजेंद्र शर्मा व एमडीयू के प्रो.यु़द्धवीर सिंह ने किया संबोधित

महेंद्रगढ़ : ज्ञान का उचित प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि वो मातृभाषा में उपलब्ध हो। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में इस बात को गहराई से महसूस किया गया है और इसके लिए विशेष रूप से प्रावधान किया गया है। उद्देश्य स्पष्ट है कि विद्यार्थियों को मिलने वाला ज्ञान सहज स्वीकार्य हो और वह आसानी से महत्वपूर्ण बारीकियों को जान समझ कर आत्मसात कर सके। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को पूर्ण करने के लिए भी यह प्रयास निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. आर.सी.कुहाड़ ने गुरुवार को व्यक्त किए। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ व स्टूडेंट्स फोर होलेस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमेनिटी (शोध), हरियाणा के सांझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के समापन सत्र में शिक्षा जगत प्रतिष्ठित विद्वानों ने हिस्सा लिया और इनमें चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के उपकुलपति प्रो. आर.के.मित्तलदिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अश्विनी महाजन, भारतीय शिक्षण मंडल के डॉ. पुष्पेंद्र राठी, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. तेजेंद्र शर्मा व महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रो. युद्धवीर सिंह का नाम प्रमुख रहा।

                     आत्मनिर्भर भारत: विषय एवं चुनौतियां विषय पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के समापन सत्र में शामिल गणमान्य अतिथियों व प्रतिभागी शिक्षक, विद्यार्थियों, शोघार्थियों को संबोधित करते हुए हकेंवि के कुलपति प्रो.आर.सी.कुहाड़ ने कहा कि दो दिवसीय इस आयोजन में जिस तरह से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आवश्यक विभिन्न विषयों पर विमर्श हुआ है वो सराहनीय है और अवश्य ही इसके माध्यम से अर्जित ज्ञान का व्यावहारिक योजना निर्धारण में योगदान देखने को मिलेगा। कुलपति ने कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों के द्वार वर्णित विचारों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जो सबसे आवश्यक बात है वो है इच्छाशक्ति, संकल्पबद्धता और ज्ञान की उपलब्धता। कुलपति ने कहा कि इस प्रयास में शिक्षकों की अहम भूमिका है और उन्हें अपने योगदान के लिए विशेष रूप से काम करना होगा। कुलपति ने इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किए गए प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा निर्धारित करने में यह नीति महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस प्रयास में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक के निर्देशन, मार्ग दर्शन में तैयार नई शिक्षा नीति के सफलतम क्रियान्वयन में बढ़ चढ़कर योगदान दें।

                           समापन सत्र को संबोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो.अश्विनी महाजन ने आत्मनिर्भर भारत के विषय में भारत के ऐतिहासिक परिदृश्य और भविष्य की दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत प्राचीन काल में यूरोप में बडे़ पैमाने पर व्यापार करता था लेकिन अब स्थिति वैसी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक नीतियों में खामी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार रही है लेकिन अब हालात बदल रहे है और कोरोना काल में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया आत्मनिर्भर भारत का मंत्र हमें फिर से उसी मुकाम पर ले जाने में मददगार साबित होगा। हम वही देश है जिसने पीपीई किट, वेंटिलेटर की आवश्यकता होने पर ऐसे उल्लेखनीय परिणाम दिए है जोकि हमारी क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं। हमें जरूरत है बस आत्मनिर्भर भारत के लिए निर्माण के लिए मिलकर प्रयास करने की। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के उपकुलपति प्रो.आर.के.मित्तल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जरूरी है कि हम अपने संसाधनों को सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करें। उपलब्ध संसाधनों का भरपूर प्रयोग करके हम मौजूदा स्थितियों को बेहतर बना सकते हैं यह प्रयास रोजगार सृजन में भी मददगार होंगे। हम उत्पादन में इजाफा कर हम रोजगार में इजाफा कर सकते हैं और इसके लिए हमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित करना होगा और सुदृढ़ बनाना होगा और आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाना होगा। इस प्रयास में प्रबंधन के मामले में भी विशेष ध्यान देना होगा और उद्यमशीलता व इनोवेशन पर जोर देना होगा। नई शिक्षा नीति इन विषयों को लेकर विशेष प्रावधान भी किए गए हैं और मुझे उम्मीद है कि वो दिन दूर नहीं जब हम आत्मनिर्भर होंगे और विश्व में अपनी एक अलग पहचान कायम करेंगे। 

                     कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने हरियाणा राज्य से संदर्भ में आत्मनिर्भर भारत के कार्ययोजना और उपलब्ध संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम इस दिशा में गहराई से चिंतन-मंथन करें और योजना तैयार कर लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा फिर वो चाहे कृषि क्षेत्र की बात हो, पर्यटन व फार्मेसी आदि का क्षेत्र हो। हरियाणा राज्य में विभिन्न स्तर पर आत्मनिर्भर की भरपूर संभावनाएं मौजूद है बस जरूरत है कि उसे मेहनत के साथ योजनागत रूप से लागू करने की। इसी कड़ी महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रो. युद्धवीर सिंह ने ग्रामीण भारत में लागू आत्मनिर्भरता का मॉडल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास हमारे लिए नया नहीं है बस इसे मौजूदा समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अमल में लाने के लिए आवश्यक प्रयास करने की आवश्यकता है। भारतीय शिक्षण मंडल के डॉ. पुपेंद्र राठी ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के उद्देश्य को विशेष रूप से महत्व दिया गया है। यह एक ऐसी शिक्षा नीति है जो समाज पोषित नीति है और इसके माध्यम से हम युवा पीढ़ी को नए भारत के निर्माण के लिए तैयार कर पायेंगे। डॉ. राठी ने कहा कि नई नीति हमें समाज हित में अध्ययन, शोध के लिए अवसर प्रदान करती है जोकि आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पाने में मददगार है। आज हमें युवाओं की बौद्धिक शक्ति का निर्माण करना होगा।

                    कार्यक्रम के संयोजक व स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज के डीन डॉ. आनंद शर्मा ने इस आयोजन में हुए विमर्श का उल्लेख करते हुए इसमें सक्रिय भागीदारी करने वाले विद्धानों, विद्यार्थियों, शोद्यार्थियों के योगदान को सराहा और उनका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. रंजन अनेजा ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि बीते दो दिनों में किस तरह से आत्मनिर्भर भारत के निमार्ण के संदर्भ संवाद हुआ और विशेषज्ञों ने विशेष रूप से किन बातों पर जोर दिया। राष्ट्रीय वेबिनार की आयोजन सचिव डॉ.पूजा राव व सह आयोजन सचिव राहुल गोयत ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, विद्यार्थी, शोघार्थियों के साथ-साथ बैकिंग, कृषि व इंडस्ट्री से जुडे़ लोगों ने भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन में आयोजन समिति सदस्य डॉ. रणबीर सिंह, डॉ. एपी शर्मा, डॉ. दिव्या, डॉ.रविंद्र कौर, डॉ. सुयश मिश्रा, श्री आलेख एस नायक, डॉ. विकास व श्री सुनील अग्रवाल ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।