युवा पीढ़ी की क्षमताओं के विकास से बनेगा आत्मनिर्भर भारत: प्रो.आर.सी.कुहाड़

  • -हकेंवि में शोध, हरियाणा के सहयोग से दो दिवसीय वेबिनार की हुई शुरुआत
  • -स्वदेशी जागरण मंच के श्री सतीश कुमार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री व गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.भगवती प्रकाश शर्मा ने किया संबोधित

महेन्द्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी.कुहाड़ का कहना है कि कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा प्रस्तुत आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में देशभर में विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास जारी है। जमीनी स्तर पर क्षमताओं के विस्तार के साथ-साथ वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रम शक्ति के विकास और युवाओं को नए भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करने की दिशा में निरंतर योजनागत स्तर पर नीति निर्धारण व कार्यन्वयन की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि  केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के प्रयासों से शिक्षा मंत्रालय द्वारा विस्तृत चिंतन मंथन के बाद तैयार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में विशेष रूप से कौशल निर्माण पर जोर दिया गया है ताकि युवा पीढ़ी रोजगार पाने का इच्छुक न बने बल्कि रोजगार प्रदान करने की भूमिका में नजर आए। 
          यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी.कुहाड़ ने बुधवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ व स्टूडेंट्स फोर होलेस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमेनिटी (शोध) , हरियाणा के सांझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। 'आत्मनिर्भर भारत: विषय एवं चुनौतियां' विषय पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र को स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह संगठक श्री सतीश कुमार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री व गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोयडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने संबोधित किया। 
           हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी.कुहाड़ ने इस अवसर पर कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरूरी है कि युवा पीढ़ी के सर्वार्गींण विकास का मार्ग प्रशस्त हो। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नेतृत्व व मार्गदर्शन में लागू की जा रही नई शिक्षा नीति को निर्णायक बताया। प्रो. कुहाड़ ने बताया कि नई शिक्षा नीति में न सिर्फ विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए पंजीकरण की दर में इजाफा करने पर जोर नहीं दिया गया है बल्कि उसके कौशल विकास पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया है और उच्च शिक्षा ही नहीं बल्कि स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को कौशल संपन्न बनाने पर जोर दिया गया है। कुलपति ने इस अवसर पर वोकल फोर लोकल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से दिया गया यह मंत्र इस दिशा में प्रयासरत युवाओं को प्ररेणा प्रदान करने में मददगार साबित हो रहा है और आत्मनिर्भर भारत के लिए निर्माण के लिए कुछ विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। इनमें कौशल विकास के स्तर पर विशेष अध्ययन, उल्लेखनीय विकास योग्य कार्यक्षेत्रों की खोज करना और उनका विकास करना, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव पर जोर देना और पाठ्यक्रमों में वैल्यू एडेड कोर्सेज को शामिल करना प्रमुख है। कुलपति ने इस अवसर पर शिक्षा नीति के सफलतम क्रियान्वयन के माध्यम से युवाओं को रोजगार प्रदात्ता के रूप में विकास के अवसर प्रदान करने पर जोर दिया। 
          कार्यक्रम में अपने संबोधन में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह संगठक श्री सतीश कुमार ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा भारत के लिए नई नहीं है। भारत प्राचीनकाल से इस दिशा कार्यरत है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण विषय को एक बार फिर से आमजन जोकि इसे भूलाता जा रहा था, को पुनः इसके महत्व से अवगत कराया है। विश्व में बिगड़ी आर्थिक स्थिति, युद्ध के हालातों के उपजने के बीच बेहद आवश्यक हो गया है कि भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढे़ और संसाधनों के बेहतर प्रयोग का मार्ग प्रशस्त करें। कोरोना काल में जिस तरह से भारत ने पीपीई किट के उत्पादन, वेंटिलेकर की व्यवस्था और टेंस्टिंग की सुविधा के मोर्चे उल्लेखनीय कार्य किया है उससे साबित होता है कि हमारी युवा शक्ति किसी भी स्तर पर पीछे नहीं है। श्री सतीश कुमार ने इस अवसर पर एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और योगगुरु बाबा रामदेव का उल्लेख करते हुए युवाओं में उपलब्ध क्षमताओं का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोयडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने तकनीकी राष्ट्रवाद की बात की और कहा कि हमें अब इस दिशा में विस्तार से सोचना होगा और काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपना सर्च इंजन विकसित करना होगा, हमें अपनी सॉफटवेयर विकसित करने होंगे और जहां तक क्षमताओं की बात है तो हमारे पास युवा शक्ति की कोई कमी नहीं है बस जरूरत है कि उसे सही दिशा में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना। आयोजन में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए सबसे जरूरी है कि पहले हम समझे की आखिर हम क्या मन से इसके लिए तैयार हैं। आत्म संकल्प के बिना हम इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। प्रो. अग्निहोत्री ने इस अवसर स्वयं श्रेष्ठता के भाव का उल्लेख किया और कहा कि इसके अनुभव के बिना हम आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने इस अवसर पर भाषा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के आवश्यक है कि हम ज्ञान-विज्ञान को अपनी भाषा में उपलब्ध कराये ताकि आमजन तक वह सहज हो सके और हर तबके को उसका लाभ मिल सके। इसके बिना आत्मनिर्भरता के उद्देश्य की पूर्ति संभव नहीं हो सकेगी। देश की भाषाएं इस कार्य को करने में सक्षम है सशक्त है और हमें इनके माध्यम से ज्ञान विज्ञान के प्रसार पर जोर देना होगा।  
          कार्यक्रम के आरंभ में शोध के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. आलोक पांडे ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और शोध के माध्यम से विभिन्न शिक्षण संस्थानों में लगातार विभिन्न विषयों पर जारी चिंतन -मंथन के प्रयासों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के संयोजक व स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज के डीन डॉ. आनंद शर्मा ने इस आयोजन के माध्यम से अगले दो दिनों तक होने वाले विचार-विमर्श के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. रंजन अनेजा, आयोजन सचिव डॉ.पूजा राव व सह आयोजन सचिव राहुल गोयत ने बताया कि इस आयोजन में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, विद्यार्थी, शोघार्थियों के साथ-साथ बैकिंग, कृषि व इंडस्ट्री से जुडे़ लोगों ने भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन में आयोजन समिति सदस्य डॉ. रणबीर सिंह, डॉ. एपी शर्मा, डॉ. दिव्या, डॉ.रविंद्र कौर, डॉ. सुयश मिश्रा, श्री आलेख एस नायक, डॉ. विकास व श्री सुनील अग्रवाल ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।