कड़ी मेहनत है शोएब व आंकांक्षा की सफलता का रहस्य

 

शोएब आफताब को लॉकडाउन ने दिया स्वाध्याय का अवसर
शोएब ने (NEET) परीक्षा में शत प्रतिशत अंक हासिल कर रचा इतिहास

 

नई दिल्ली।

 

   मेडिकल प्रवेश के लिये आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET)में शत प्रतिशत अंक हासिल कर इतिहास रचने वाले ओड़िसा निवासी शोएब आफताब तथा उत्तरप्रदेश के कुशीनगर निवासी अकांक्षा सिंह की सफलता का रहस्य निरंतर अध्ययन तथा अथक मेहनत है। इन दोनों ने ही परीक्षा में शतप्रतिशत अंक 720 में से 720 अंक हासिल किये हैं। शोएब आफताब को AIR 1 रेंक मिली है जबकि टाई ब्रेकर नीति के कारण आंकाक्षा को AIR 2 रेंक मिली है। लड़कियों के बीच वह पहली टॉपर बन गई हैं। शोएब की उपलब्धि से जहां पूरा ओडिसा गौरवान्वित है तो आकांक्षा सिंह की उपलब्धि पर उत्तरप्रदेश को गर्व है।   

कार्डियेक सर्जन बनना चाहता है शोएब आफताब

      एनईईटी परीक्षा में 720 अंक में से 720 अंक हासिल करने वाला शोएब आफताब ओडिसा के राउकरेला के एक साधारण परिवार से है। वह कोटा में कोचिंग कर इस परीक्षा की तैयारी कर रहा था, उसके पिता राउकरेला में अकेले रहते हैं जबकि छोटी बहन तथा उसकी मां उसके साथ कोटा में ही रह रहे थे। कल जब परीक्षा का परिणाम आया तो मानों पूरे परिवार का सपना साकार हो गया। उसकी मां खुशी के मारे अपने आंसु नहीं रोक पाई।  
           

शोएब के पिता व्यापारी हैं, जो पहले चाय का व्यापार करते थे और उसके बाद उन्होंने निर्माण के व्यवसाय में कदम रखा। शोएब कहते हैं, 'मैं जब आठवीं कक्षा में था उस वक्त मेरे पिता को चाय के व्यापार में जबरदस्त नुकसान हुआ, जिसकी बदौलत उन्होंने अपना व्यवसाय ही बदल लिया। लेकिन इसके बाद भी उनके परिवार ने उनको पूरा समर्थन दिया और पढ़ाई करने के लिए उनके साथ खड़े रहे।'

परिवार का पहला सदस्य जो मेडिकल की पढ़ाई करेगा

शोएब अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, जो कि मेडिकल की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने इसी साल बारहवीं कक्षा पास की है और पहले ही प्रयास में नीट में देशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया। बारहवीं में शोएब के 95.8 फीसदी नंबर थे, जबकि उन्होंने दसवीं कक्षा की परीक्षा 96.8 फीसदी अंकों के साथ पास की थी। वह मेडिकल की पढ़ाई खत्म करने के बाद कार्डियेक सर्जन बनना चाहते हैं।

मेहनत से ही तय हुआ सफलता का रास्ता

     शोएब आफताब के अनुसार उसकी सफलता का रास्ता मेहनत से ही तय हुआ है। शोएब के अनुसार इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिये उसने अथक मेहनत की और अपनी कई आदतों में भी सुधार किया। शोएब के अनुसार मेहनत के कारण ही उसे छात्रवृत्ति भी मिली।   

स्कूल के साथ साथ की नीट की तैयारी
     शोएब आफताब के अनुसार उन्होंने अपने स्कूल की पढ़ाई और नीट की तैयारी दोनों ही साथ-साथ की। वह स्कूल के बाद सीधे अपने कोचिंग क्लासेस जाते थे और उसके बाद घर पर भी दो से तीन घंटे तक जमकर पढ़ाई करते थे। शोएब के अनुसार छुट्टियों और रविवार के दिन को वह अध्ययन करते थे और अंतिम दिनों में तो परीक्षा के लिये 12 से 14 घंटे तक अध्ययन किया। वह कहते हैं कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता तथा माता का अत्यंत योगदान है जिन्होंने स्वयं कष्ट सहकर हमेशा उसकी मदद की।  

 

 पूर्वांचल की कई लड़कियों के लिए प्रेरणा है आंकाक्षा सिंह 

          आकांक्षा सिंह की यह सफलता पूर्वांचल की कई लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनके डॉक्टर बनने के उत्साह ने उन्हें कुशीनगर से गोरखपुर के अपने गाँव तक 70 किलोमीटर का सफर तय करने का जज्बा दिया। वह एक भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत सार्जेंट की बेटी हैं।  वह यूपी टॉपर भी है। कुशीनगर की वह पहली लड़की हैं जिसने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में इतना अच्छा रिजल्ट हासिल किया है। 

आठवीं कक्षा तक वह सिविल सर्विस में जाने की सोच रही थी


          आकांक्षा सिंह के अनुसार  आठवीं कक्षा तक वह सिविल सर्विस में जाने की सोच रही थी। लेकिन नौवीं में आते ही उनका मन बदल गया और उन्होंने डॉक्टर बनने के सपने के साथ ही नीट परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने इस परिणाम को सभी बाधाओं से लड़ते हुए प्राप्त किया है। इस सपने को पूरा करने के लिए आकांक्षा ने दिन-रात एक कर दिया था। वह पढ़ने के लिए कुशीनगर से निकलकर गोरखपुर और बाद में दिल्ली तक गईं और कड़ी मेहनत से तैयारी की।
 
पिता एक भूतपूर्व सैनिक और मां टीचर

आकांक्षा के पिता भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं। उनकी मां रुचि सिंह गांव में ही प्राथमिक स्कूल की टीचर हैं। बेटी की इस कामयाबी से वे दोनों बेहद खुश हैं। शुक्रवार को रिजल्ट आने के बाद उन्होंने अपने पूरे गांव में मिठाई बांटकर इस खुशी का इजहार किया।