मन, वचन और कर्म से प्रतिबद्ध होकर हिन्दी के संवर्धन में दें योगदान- प्रो. कुहाड़

-हकेंवि में हिन्दी दिवस के अवसर पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन

-कुलपति बोले माननीय केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री के प्रयासों से हिन्दी के प्रसार को मिल रहा है बल

 

महेन्द्रगढ़ : राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की एकता और उन्नति के लिए आवश्यक है - राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के इस कथन के साथ हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेन्द्रगढ़ के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने हिन्दी-दिवस के मौके पर आयोजित ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान हेतु अपने सम्बोधन की शुरुआत की। कुलपति ने इस आयोजन को हिन्दी के प्रचार-प्रसार की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा जारी महत्त्वपूर्ण प्रयास बताया। साथ ही उन्होंने केन्द्रीय शिक्षामन्त्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक के द्वारा हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया और उन्हें हिन्दी के विकास में उपयोगी बताया। विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस आयोजन समिति व राजभाषा अनुभाग द्वारा आयोजित इस आभासी कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. राजेन्द्र गौतम व कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. अमरनाथ शर्मा उपस्थित रहे।

आधुनिक भारत और हिन्दी विषय पर आयोजित इस विशेषज्ञ व्याख्यान में सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने माननीय केन्द्रीय शिक्षामन्त्री, श्री रमेश पोखरियाल निशंक का संदेश सभी विशेषज्ञों व प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस सम्बोधन में विशेष रूप से कहा गया कि आज का युग प्रौद्योगिकी का युग है। हम हिन्दी के प्रचार-प्रसार में यथासंभव प्रौद्योगिकी का उपयोग करें। हमें भाषा-दक्ष होने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी-सक्षम भी होना होगा। इससे हमारे काम की क्षमता कई गुणा बढ़ जाएगी। माननीय प्रधानमन्त्री ने विश्व-हिन्दी-सम्मेलन में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर विशेष जोर दिया है। हिन्दी दिवस के इस पावन पर्व पर शिक्षा मंत्री ने संदेश के माध्यम से सरकारी काम-काज में अधिक से अधिक हिन्दी के प्रयोग के लिए प्रतिज्ञा भी दिलाई। शिक्षामन्त्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी ने मन्त्रालय का कार्यभार सम्भालते ही अधिकारियों, कुलपतियों, निदेशकों, शिक्षाविदों व कर्मचारियों सभी को हिन्दी के प्रयोग के प्रति प्रोत्साहित किया। कुलपति ने कहा कि मैं खुद इस बात का साक्षी हूँ कि हमारे कुछ साथी जो  हिन्दी-भाषी नहीं हैं वे भी आज हिन्दी का प्रयोग करने का प्रयास करते हैं। प्रो. कुहाड़ ने इस आयोजन के सन्दर्भ में कहा कि आधुनिक भारत और हिन्दी ये विषय स्पष्ट करता है कि विश्वविद्यालय हिन्दी के बढ़ते प्रभाव को लेकर गम्भीर है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत है। कुलपति ने इस अवसर पर आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कथन भाषा की सरलता, सहजता और शालीनता अभिव्यक्ति को सार्थकता प्रदान करती है। हिन्दी ने इन पहलुओं को खूबसूरती से समाहित किया है का विशेष रूप से उल्लेख किया। कुलपति ने अन्त में कहा कि मैं केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने अपना संदेश भेजा और हिन्दी के प्रचार-प्रसार व उपयोग के लिए आह्वान किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि जीवन में बड़ी उपलब्धियाँ सहज ही प्राप्त नहीं होती इसके लिए कठोर परिश्रम करना होता है। हमारे समक्ष डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, अब्राहम लिंकन और आदरणीय श्री प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी जैसे उदाहरण उपलब्ध हैं जोकि अपने जीवन में कठोर परिश्रम कर सफलता के शिखर तक पहुँचें। हिन्दी भाषा के संदर्भ में कुलपति ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया है कि भारत राष्ट्र की राजभाषा हिन्दी तथा उसकी लिपि देवनागरी होगी। यह निर्णय 14 सितम्बर को लिया गया था, तभी से 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रो. कुहाड़ ने बताया कि विश्व में लगभग 100 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिन्दी भाषा का विश्व में चौथा स्थान है। कुलपति ने इस अवसर पर सम्मिलित हुए विशेषज्ञ विद्वानों व प्रतिभागियों को हिन्दी-दिवस की शुभकामनाएँ भी दी।

इस आयोजन में विशेषज्ञ वक्ता प्रो. अमरनाथ शर्मा ने हिन्दी के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह से भाषा आधुनिकता की ओर अग्रसर है। उन्होंने भाषा के विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्त्व देने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसी तरह विशेषज्ञ वक्ता के रूप में शामिल प्रो. राजेन्द्र गौतम ने भी हिन्दी के ऐतिहासिक पक्ष पर प्रकाश डाला और भारत में हिन्दी भाषा के महत्त्व पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। प्रो. गौतम ने नई राष्ट्रीय शिक्षा-नीति में भाषा के महत्त्व पर विस्तार से चर्चा की और प्रतिभागियों को उसके विभिन्न पक्षों से अवगत कराया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण हिन्दी दिवस आयोजन समिति के संयोजक व दयानन्द सरस्वती पीठ के पीठाचार्य प्रो. रणवीर सिंह ने दिया जबकि धन्यवाद ज्ञापन समिति की सदस्य व शिक्षा-पीठ की सहायक आचार्य डॉ. रेनु यादव ने प्रस्तुत किया। इस आभासी कार्यक्रम का संचालन समिति सदस्य व शिक्षा पीठ के सहायक आचार्य डॉ. शंकर लाल ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जे.पी. भूकर, विभिन्न पीठों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारी, विद्यार्थी व शोधार्थी व देश के विभिन्न संस्थानों से प्रतिभागी शामिल हुए।