अशिक्षा की काली बादल हटाकर  शिक्षा का भोर बनकर उभरेगा बिहार

कनक झा
              आज हम बात कर रहे हैं उस बिहार की जिसने हमें साहस और बुलंदियों का इतिहास दिया, जिसने हमें लिच्छवी गणतंत्र दिया, जिसने हमें शून्य दिया, जो हर साल भारत को बड़ी संख्या में सरकारी अफसर, डॉक्टर और इंजीनियर देता है। लेकिन फिर भी उस बिहार से अशिक्षा का अंधकार क्यों नहीं हटता है? क्यों बिहार आज भी अशिक्षित और पिछड़ा राज्य है?
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि बिहार के लोगों में प्रतिभा नहीं है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि बिहार के लोगों में कुछ कर गुजरने की इच्छा नहीं है, किंतु एक बात अवश्य है बिहार के लोगों के पास अवसर नहीं है। 
                बिहार संघर्ष करता है शिक्षा और रोजगार के अवसरों को पाने के लिए। किंतु बिहार के राजनेता बिहार को उस अवसर से दूर करते हैं। वो सोचते हैं कि यह नादान मासूम सा बिहार शिक्षित हो जाएगा तो शायद उनकी कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। और जब शिक्षित बिहार सही और गलत का अंतर समझ जाएगा तो जिस कुर्सी पर राजनेता बैठे राज कर रहे हैं वह कुर्सी जनता के सुरक्षित हाथों में आ जाएगा। बिहार में महान कवि, रचनाकार, ज्ञानी हुए जिन्होंने शिक्षा हासिल करने के लिए पूर्ण संघर्ष किया। लेकिन उन लोगों का क्या जिन्हें यह यकीन दिलाया गया कि शिक्षा से कुछ नहीं होगा, तुम्हारा विकास राजनेताओं को दिए गए वोट के बदले मिले पैसे, राशनकार्ड से मिलने वाले अनाज और मजदूरी से होगा। 
            अशिक्षा का अंधकार तभी हटेगा जब इन राजनेताओं को सिंहासन से हटाकर जनता गद्दी संभालेगी। बिहार के बच्चों में भरपूर हुनर है किंतु उस हुनर को प्रस्तुत करने का तरीका उन्हें नहीं मालूम। इसकी वजह वहाँ की शिक्षा व्यवस्था, वहाँ के शिक्षक हैं। वहाँ के शिक्षकों को खुद नहीं पता कि वे बच्चों को किस तरह से प्रतिभाशाली बना सकते हैं। सरकारी स्कूल के शिक्षकों का कुछ ऐसा ही हाल है। जब शिक्षक पद की वेकैंसी निकलती है तो पाँचवी छठी फेल जिन्हें बुक पढ़ना भी नहीं आता वह घूस देकर शिक्षक बन जाते है और बच्चों के भविष्य को अंधकार से भर देते हैं। 
           मुझे उम्मीद है कि बिहार जागेगा और अशिक्षा के काले बादल को हटाकर शिक्षा के भोर की किरण जरुर लाएगा जो सम्पूर्ण बिहार को शिक्षा से रौशन कर देगा।