विद्यार्थियों के हित में कदम बढ़ाए डीयू

 

-वेबिनार आयोजित, शिक्षक, छात्र प्रतिनिधियों रखा अपना मत

-छात्रसंघ प्रतिनिधि बोले कुलपति का निर्णय स्वीकार नहीं

-कुलपति से अपील हितधारकों की अनदेखी से बचे, चर्चा से निकाले स्वीकार्य समाधान

-विकेंद्रीकरण के माध्यम से बेहतर परिणाम और पिछले सेमेस्टरों व वर्तमान सेमेस्टर के आंतरिक मूल्यांकन को भी विकल्प के रूप में अपनाने को मिला समर्थन

कोरोना महामारी के कारण देशभर में बने हालातों के मद्देनजर दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम कराने का निर्णय लिया है। लेकिन विश्वविद्यालय कुलपति प्रो.योगेश त्यागी की ओर से ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम कराने के निर्णय का विश्वविद्यालय के विभिन्न सहभागियों को स्वीकार नहीं है। विशेष रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने कुलपति के इस निर्णय को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही साथ शिक्षक प्रतिनिधियों ने भी साफ कर दिया है कि इस विषय में सकारात्मक संवाद बिना कोई भी एकतरफा  छात्र विरोधी निर्णय स्वीकार नहीं होगा।

इस सम्बंध में एक वेबिनार के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के वर्तमान व पूर्व प्रतिनिधियों, कार्यकारी व विद्वत परिषद के वर्तमान व पूर्व सदस्यों ने तथा छात्र संघ व संगठनों के प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की ओर ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम को सिरे से खारिज कर दिया है। इन सभी सहभागियों का मत है कि करीब 8 लाख विद्यार्थियों के लिए किसी एक व्यवस्था को बिना विचार -विमर्श के लागू किया जाना उचित नहीं है।चर्चा में विकेंद्रीकरण के माध्यम से बेहतर परिणाम और पिछले सेमेस्टरों व वर्तमान सेमेस्टर के आंतरिक मूल्यांकन को भी विकल्प के रूप में अपनाने को समर्थन मिला।

 

दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य डॉ.एके भागी, वर्तमान सदस्य डॉ.वीएस नेगी व राजेश गोगना की और से आयोजित इस चर्चा में वर्तमान शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ.राजीव रे ने स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर मूल्यांकन का प्रारूप प्रस्तुत करते हुए मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षा के आयोजन का विरोध किया। शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. आलोक रंजन पांडे ने भी कुलपति के फैसले पर ऐतराज जताया। इसी कड़ी में डीयू कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य डॉ.एके भागी ने कहा कि यहां बात सिर्फ डेढ़ से दो लाख रेगुलर कॉलेज के विद्यार्थियों की नहीं है यहाँ विषय नॉन कोलीजिएट वीमेन एजुकेशन बोर्ड व स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के भी करीब पांच से छह लाख विद्यार्थियों का है। ओपन बुक एग्जाम इन सभी के लिए उचित नहीं होगा। डॉ. भागी ने विश्वविद्यालय कुलपति द्वारा इस विषय में विभिन्न सहभागियों से सवांद हीनता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली विश्वविद्यालय के हित में नहीं है। 

चर्चा में कार्यकारी परिषद के सदस्य राजेश गोगना, डॉ. वीएस नेगी ने भी ऑनलाइन एग्जाम के सम्बंध में लगातार प्रशासन द्वारा लिए जा रहे एकतरफा निर्णयों पर ऐतराज जताया और कहा कि बिना चर्चा के इस समस्या का हल सम्भव नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ.एनके कक्कड़ ने भी विशेषज्ञ के रूप में कहा कि इस विषय को गंभीरता के साथ हल किया जाना चाहिए। 

इस चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अक्षित दहिया व संयुक्त सचिव शिवांगी खारवाल का कहना था कि उन्हें कुलपति का निर्णय स्वीकार नहीं है और छात्रसंघ विद्यर्थियों के हित में ओपन बुक एग्जाम के विरोध में है। इसी तरह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली के अध्यक्ष डॉ.अभिषेक टंडन व सचिव सिद्धार्थ यादव ने भी विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उनका मत था कि विद्यार्थी स्वयं तय करें कि उसके लिये क्या उचित है। उन्होंने कुलपति के रैवये पर भी ऐतराज जताया कि उन्हें कुलपति का निर्णय स्वीकार नहीं है और उनका संगठन इसके खिलाफ है। वेबिनार के अंत में यूजीसी के पूर्व सदस्य डॉ. आई एम कपाही ने चर्चा का समायोजन विशेषज्ञ वक्तव्य के साथ किया और कहा कि डीयू में कोई एक व्यवस्था कारगर नहीं रहेगी और इस परिस्थिति में बिना सहभागियों से संवाद किए यदि कोई समाधान किया जाता है तो वह गलत होगा इसलिए कुलपति को इस विषय में सकारात्मक रूख अपनाते हुए आगे बढ़ना होगा।