लॉकडाऊन में आनलाइन शिक्षा के प्रयोग से खुली नई राह

  •  ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं की मुश्किलें बढ़ी
  • सरकार  आनलाइन शिक्षा के माध्यम से कर रही है लॉकडाऊन की भरपाई

 
 
  नई दिल्ली। कोरोना के प्रकोप के कारण देश भर में उत्पन्न एक माह के लॉकडाऊन की स्थिति में एक तरफ ई-लर्निंग के नये नये प्रयोगों से आन लाइन शिक्षा की एक नई राह खुली है तो दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर छात्र-छात्राओं का नुकसान भी हुआ है।   गांव गांव तक छात्रों को आनलाइन शिक्षा से जोडऩे के प्रयास हालांकि सरकार लगातार कर रही है लेकिन लॉकडाऊन से जो नुकसान छात्रों का हुआ है उसकी भरपाई के लिये अब सरकार के साथ साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। 
       खतरनाक वायरस कोरोना के विश्वव्यापी प्रकोप के चलते देश के अधिकतर राज्यों में देश व्यापी लॉकडाऊन से पहले ही स्कूल कालेजों को बंद कर दिया गया था। स्कूल बंद होने और फिर लॉकडाऊन होने के कारण अनेक राज्यों में छात्र छात्राओं की परीक्षाएं भी नहीं हो सकी हैं नतीजतन राज्य सरकारों ने स्कूली स्तर पर छात्र छात्राओं को बिना परीक्षा के ही उनके पूर्व परिणाम के आधार पर मूल्यांकन करते हुए अगली परीक्षा में भेजने का निर्णय लिया है। एक अप्रैल से देश भर के अधिकतर राज्यों में स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र शुरु हो गया है लेकिन लॉकडाऊन के कारण सभी स्कूल बंद हैं ऐसे में छात्र छात्राओं की शिक्षा को जारी रखने के लिये निजी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अब आनलाइन माध्यम से शिक्षा देने की पहल शुरु की गई है। 
           सीबीएसई गवर्निंग बाडी की सदस्य तथा माउंट आबू स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति अरोड़ा का कहना है कि लॉकडाऊन से बच्चों की शिक्षा का नुकसान नहीं हुआ है बल्कि आनलाइन लर्निंग के ऐसे सफल प्रयोग देश भर में हुए हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की गई थी। यही नहीं बच्चे नये नये क्रियाकलापों के साथ आनलाइन माध्यमों से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आन—लाइन लर्निंग का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अध्यापकों द्वारा जो भी शिक्षा दी जा रही है उसे अभिभावक भी देख रहे हैं, इसलिये लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो गई है। उनका कहना है कि प्राइवेट स्कूलों के अलावा सरकार ने भी कई पोर्टल शुरु किये हैं जहां छात्र छात्राओं के सामने एक ही अध्याय को बार बार सुनने व देखने का विकल्प है जबकि कक्षा में ऐसे विकल्प नहीं होते। उन्होंने कहा कि लॉकडाऊन एक प्रकार से शिक्षा को नये सिरे से हासिल करने का एक अवसर है और देश के अधिकतर छात्र छात्राएं इस अवसर का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या हो सकती है लेकिन धीरे धीरे वहां भी छात्र आनलाइन लर्निंग में स्वयं को सहज महसूस करने लगेंगे।  
         पब्लिक स्कूल एसोसिएशन आफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनन बुद्धिराजा का कहना है कि  कि सूचना प्रोद्योगिकी के इस युग में डिजिटल माध्यम से शिक्षा प्रदान करने में कोई बड़ी तकनीकी चुनौतियां सरकार व स्कूलों के सामने नहीं हैं और शहरी क्षेत्रों में छात्र छात्राओं को डिजिटल माध्यम से शिक्षा हासिल करने में कोई ज्यादा कठिनाई भी नहीं है क्योंकि शहरी क्षेत्र के ज्यादातर छात्र छात्राएं डिजिटल माध्यमों से चिरपरिचित हैं। बड़ी समस्या ग्रामीण क्षेत्रों के सामने है। देश की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में है और ज्यादातर ग्रामीण छात्र छात्राएं डिजिटल माध्यमों से ना तो परिचित हैं और ना ही उन्हें डिजिटल माध्यम से शिक्षा हासिल करने का ज्ञान है। ऐसे में लॉकडाऊन का सर्वाधिक नुकसान ग्रामीण क्षेत्र के छात्र छात्राओं को हुआ है।  
       उच्च शिक्षा के स्तर पर लॉकडाऊन से छात्र छात्राओं के सामने शिक्षा हासिल करने को लेकर तो कोई समस्या नहीं है लेकिन बड़ी समस्या परीक्षाओं को लेकर है। देश के अनेक विश्वविद्यालयों में अभी सेमेस्टर की परीक्षाएं नहीं हुई हैं और लॉकडाऊन के कारण परिक्षाएं आयोजित करने में कठिनाई आ रही है। कुछ विश्वविद्यालयों ने छात्रोंं के लिये घर से ही आनलाइन परीक्षाएं आयोजित करने का निर्णय लिया है।