विभागाध्यक्ष ना बनाए जाने पर डीयू में निकाली न्याय मार्च  रैली 

* डीयू कैम्पस में निकाली गई "न्याय मार्च " रैली ।

* रैली के बाद राष्ट्रपति, एमएचआरडी, यूजीसी व वाइस चांसलर को दिया गया ज्ञापन।

              दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पिछले 24 दिनों से विभागाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।13 सितम्बर से विभाग में अध्यक्ष पद खाली पड़ा हुआ है। वरिष्ठता क्रम में प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन का क्रम होने के बावजूद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी नियुक्ति को लेकर अड़चन पैदा कर रहा है।प्रो. बेचैन के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ आज दिल्ली विश्वविद्यालय में "न्याय मार्च " रैली निकाली गई।रैली से पहले विभिन्न विश्वविद्यालयों आईपी यूनिवर्सिटी, जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों, छात्र,शिक्षक आर्ट्स फैकल्टी, नार्थ कैम्पस में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।इस मार्च का आयोजन फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस, एसडीटीएफ,आइशा, केवाईएस,सीवाईएसएस के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। न्याय मार्च रैली का नेतृत्व डॉ. के पी सिंह प्रो.हंसराज 'सुमन' डॉ. लक्ष्मण सिंह यादव, डूटा के संयुक्त सचिव डॉ. प्रेमचंद  ,एस के सागर ,डॉ. रविंद्र कुमार आदि ने किया।

            न्याय मार्च रैली आर्ट्स फैकल्टी से होते हुए, विवेकानंद मूर्ति, लॉ फैकल्टी, ज्योलॉजी, बॉटनी, मिरांडा हाउस,मेघदूत हॉस्टल, एसओएल,गवायर हॉल हॉस्टल, पीजी मेंस हॉस्टल होते हुए वाइस चांसलर ऑफिस पहुंची।वाइस चांसलर ऑफिस के सामने लगभग एक घन्टे सरकार विरोधी नारे लगाए और अंत में महामहिम राष्ट्रपति, एमएचआरडी, यूजीसी,संसदीय समिति और वीसी को उनकी अनुपस्थिति में ऑफिस को एक ज्ञापन सौंपा गया।वीसी को दिए ज्ञापन में मांग की गई है कि विभाग की वरिष्ठता सूची क्रम में प्रो. श्योराज सिंह ' बेचैन ' को अविलंब विभागाध्यक्ष का कार्यभार सौंपा जाए।

           फोरम के चेयरमैन व पूर्व विद्वत परिषद सदस्य प्रो. हंसराज 'सुमन 'ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहला मामला  सामने आया है जहां विभाग की वरिष्ठता सूची को दरकिनार करते हुए पिछले 24 दिनों से विभागाध्यक्ष नहीं बनाया गया है।हिंदी विभाग की वरिष्ठता सूची में प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन का नाम सबसे ऊपर है, बावजूद उन्हें आज तक हिंदी विभाग का अध्यक्ष ना बनाना यह दर्शाता है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में किस तरह से जातीय भेदभाव पनप रहा है। प्रो. हंसराज 'सुमन 'ने  दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रो. श्योराज सिंह बेचैन को विभागाध्यक्ष नियुक्त न करना विश्वविद्यालय अधिनियमों का खुलेआम उल्लंघन करना है।

                            उन्होंने बताया है कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है  कि  प्रो. बेचैन को विभागाध्यक्ष इसलिए नहीं बनाया जा रहा कि विभाग के एक अन्य प्रोफेसर ने अपना दावा प्रस्तुत किया है,उनका कहना है कि वे प्रो. बेचैन से वरिष्ठ है जबकि विभाग में उनसे 8 महीने जूनियर है साथ ही विभाग ने जब वरीयता सूची तैयार की हुई है और उसी के आधार पर प्रो. बेचैन विभाग में वरिष्ठ होने के नाते अध्यक्ष पद के दावेदार है। उन्होंने डीयू प्रशासन वरिष्ठता क्रम की अनदेखी करने का आरोप लगाया है और सीधे तौर पर जातीय भेदभाव का मामला है।यदि जल्द ही उन्हें नियुक्त नहीं किया तो दिल्ली से बाहर भी आंदोलन जा सकता है।

          डूटा के संयुक्त सचिव डॉ. प्रेमचंद ने अपने संबोधन में मांग की है कि बिना किसी पक्षपात के वरिष्ठता क्रम के अनुसार प्रो. श्योराज सिंह बेचैन को अध्यक्ष पद दिया जाये।उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें विभागाध्यक्ष का कार्यभार नहीं सौंपा तो इस मामले को वे डूटा में लेकर जाएंगे।

                   फोरम के अध्यक्ष डॉ. के पी सिंह ने बताया है कि हिंदी विभाग  में 72 वर्षो से एक खास जाति का वर्चश्व रहा है ।उनका यह वर्चश्व टूटते देख प्रो. बेचैन को आज तक कार्यभार नहीं सौंपा गया है।उन्होंने बताया कि प्रो. बेचैन अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेखक, साहित्यकार और आलोचक है इनके बनने से विभाग की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।पिछले 70-72 वर्षों में जब एक दलित प्रोफेसर सामान्य नियुक्ति में  आकर जब वरिष्ठता सूची में ऊपर है।जब उनके विभागाध्यक्ष बनने का अवसर आया तो उन्हें दलित होने के कारण रोका जा रहा है जबकि आज तक विभाग में समय पर विभागाध्यक्ष बने हैं।

           फोरम ने विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों, छात्रों और शिक्षकों से अपील की है कि  यदि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांग पर जल्द ही ध्यान नहीं देता है तो उनका  अगला कदम मीटिंग कर तय किया जाएगा।वीसी ऑफिस से पूर्व रैली को प्रो. सुकुमार, डॉ. नंदिता नारायण, डॉ. लक्ष्मण सिंह यादव, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. सुधांशु कुमार आदि ने अपने संबोधन में मांग की है कि प्रो. बेचैन को तुरंत हिंदी विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया जाये जिससे सामाजिक न्याय हो सके।