स्कूली बसों के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करे
 
           देहरादून, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आज उत्तराखंड सरकार से कहा कि वह स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करे।
          आयोग का आरोप है कि न्यायालय के निर्देशों का राज्य में व्यापक उल्लंघन किया जा रहा है।  उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस रामास्वामी को भेजे एक पत्र में आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने कहा कि 1997 में न्यायालय ने स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षित यात्रा के लिए दिशानिर्देश जारी किया था। लेकिन इसका राज्य के कई हिस्सों में खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। आयोग ने 12 सुझाव भी दिए हैं जिनसे स्थिति में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
          आयोग द्वारा दिए गए सुझावों में यह भी है कि स्कूलों बसों के लिए उन चालकों को ही नियुक्त किया जाए जिनके पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव हो। इसके साथ ही प्रशासन को यह भी सुनिश्चित  करना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाए जो नशे की हालत में या काफी तेज रफ्तार से या लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में पहले कभी दंडित नहीं हुआ हो।  आयोग ने बसों में स्पीड गवर्नर लगाने तथा योग्य कंडक्डर नियुक्त करने की भी सलाह दी है।    लड़कियों की स्कूल बसों में महिला सहायक अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की गयी है।