बाल रंग महोत्सव में बच्चों के अभिनय से रोमांचित हुए दर्शक

 

  • रंग महोत्सव में हुआ छह बाल नाटकों का मंचन
  • नन्हें कलाकारों ने दिखाये अभिनय के जौहर



नई दिल्ली। उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा आयोजित बाल रंगमंच महोत्सव में नन्हें कलाकारों ने छह नाटकों  गुड़िया, मेरे पापा, गजमोक्ष, पांच चोरों का वेश, अभिमान तथा बेटी और बहू  का मंचन किया। सभी नाटकों में बच्चों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।


    उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा रोहिणी स्थित मदर डिवाइन पब्लिक स्कूल तथा माउंट आबू पब्लिक स्कूल में 20 मई से  शुरु हुए बाल रंगमंच शिविरों के समापन पर आईजीएनसीए आडिटोरियम में बाल रंग महोत्सव का आयोजन किया गया। आईजीएनसीए के निदेशक प्रशासन आर रंगनेकर तथा कन्सलटेंट एकेडमिक सत्यव्रत त्रिपाठी इस दौरान मुख्य अतिथि रहे।  महोत्सव में मंचित कुल छह नाटकों में उड़ान के निदेशक संजय टुटेजा के निर्देशन में तीन नाटकों अभिमान, बेटी और बहू तथा सुनील मिश्रा द्वारा लिखित नाटक गजमोक्ष का मंचन किया गया जबकि राष्ट्रीय नाटय विद्यालय के स्नातक राजेश तिवारी के निर्देशन में पांच चोरों का वेश एवं मेरी गुडिया का तथा तुषार डे व आस्था बतरा के निर्देशन में मेरे पापा नाटक का मंचन हुआ।


       इन सभी नाटकों में 150 से अधिक बाल कलाकारों ने भाग लिया जिसमें से 140 बाल कलाकारों ने लिये मंच पर आने का यह पहला अवसर था बावजूद इसके सभी बाल कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। गुडिया नाटक ने दर्शकों को जहां बेटी बचाओ व बेटी पढाओ का संदेश दिया  तो महात्मा बुद्ध की जातक कथा पर आधारित नाटक गजमोक्ष ने परोपकार का संदेश दिया। इसके अलावा पांच चोरों का वेश में समाज में अलग अलग वर्ग के पांच लोगों के भ्रष्टाचार को दिखाया गया जबकि बेटी और बहू नाटक दहेज प्रथा पर व्यंग्य था। मेरे पापा नाटक  पिता व पुत्र के आपसी स्नेह पर आधारित था। निर्देशक संजय टुटेजा ने बताया कि संस्था द्वारा यह 26वां बाल रंग शिविर था जिसमें बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को निखारने के साथ साथ उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के प्रति प्रेरित किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये उड़ान संस्था की ओर से ललित कौशिक, विजय कुमार राय, दिव्या तथा भरत तिवारी को सांस्कृतिक पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।