रंग शिविर में बच्चों की प्रतिभा को मिल रही है उड़ान


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र एवं उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट द्वारा बाल रंगमंच शिविर का आयोजन

नई दिल्ली। उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर,आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा आयोजित बाल रंगमंच प्रशिक्षण शिविर में बच्चों की प्रतिभा को नई उड़ान मिल रही है। शिविर में जहां बच्चों की शरारत को खेल खेल में नई दिशा दी जा रही है तो साथ साथ   मजेदार खेलों के माध्यम बच्चे अपनी एकाग्रता व आत्मविश्वास को बढ़ा रहे है। शिविर में शामिल सभी लगभग 150 बच्चों को मानों पंख् लग गये हैं।


         उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र संस्कृति मंत्रालय द्वारा रोहिणी स्थित माउंट आबू पब्लिक स्कूल तथा मदर डिवाइन पब्लिक स्कूल में 20 मई से चल रहे बाल रंगमंच प्रशिक्षण शिविरों में 60 से अधिक विभिन्न स्कूलों के 5 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 150 बच्चे अभिनय व नृत्य की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण लेने के साथ साथ अपनी मौलिक प्रतिभा को विकसित कर रहे हैं। पिछले 25 वर्ष से इस तरह के बाल रंगमंच प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर रहे बाल रंगमंच के विशेषज्ञ व रंगकर्मी संजय टुटेजा के संयोजन व निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में टुटेजा के अलावा प्रख्यात टीवी व फिल्म कलाकार तथा राष्ट्रीय नाटय विद्यालय के स्नातक राजेश तिवारी, वरिष्ठ रंगकर्मी तुषार डे, नृत्यांगना हिमानी खुल्लर व निशा बरतारया जहां सभी प्रतिभागियों की अभिनय व नृत्य प्रतिभा को साध रहे हैं तो साथ ही उनके सहयोगियों के रूप में आस्था बतरा, आभा सिंह, शैफाली, सुजाता गौतम,पारूल कोचर, भूमिका, भानू प्रताप व ईशमीत कौर बच्चों को परिपक्व बनाने तथा उनकी क्षमता में वृद्धि करने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।


           शिविर में शामिल बच्चों तथा उनके अभिभावकों का कहना है कि यह शिविर उनके लिये एक बड़ी उपलब्धि है। एचडीएफसी बैंक में मैनेजर राकेश सचदेवा का कहना है कि उनका बेटा सात्विक शिविर में आने से पूर्व बहुत शर्माता था लेकिन इस शिविर में आने के बाद उसके आत्मविश्वास में चमत्कारिक बढ़ोत्तरी हुई है। पांच वर्षीय बच्ची स्मिष्टि शुरु में इस शिविर में आते समय प्रतिदिन रोती थी लेकिन अब उसको ना केवल मजा आने लगा है बल्कि वह एक नाटक में भी भूमिका निभा रही है। इन शिविरों की विशेषता यह है कि इनमें 100 से अधिक ऐसे बच्चे हैं जो शिविर में आने से पूर्व तक ना तो अभिनय से कभी भी रूबरू हुए हैं और ना ही इससे पूर्व उन्हें कभी मंच पर आने का अवसर मिला है लेकिन इस शिविर में आने के बाद तो अभिनय उनके जीवन का हिस्सा बन रहा है और साथ ही उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का मौका भी मिल रहा है। 


          सभी बच्चे मिलकर इन शिविरों में पांच नाटकों गजमोक्ष, पांच चोरों का वेश, गुड़िया, मेरे पापा व अभिमान की तैयारी में लगे हैं। इन पांचों नाटकों का मंचन 23 जून को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सभागार में होने वाले बाल रंग महोत्सव में किया जायेगा। उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट के निदेशक संजय टुटेजा बताते हैं कि इस तरह के शिविर आयोजित करने के पीछे उनका उददेश्य नई पीढ़ी को सशक्त बनाना, उनमें आत्मविश्वास जगाना तथा उनकी विचार शक्ति को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि पूरा प्रशिक्षण खेल खेल में दिया जाता है ताकि बच्चों की रूचि इस प्रशिक्षण में बनी रहे। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का खास फायदा यह होता है कि इस तरह के प्रशिक्षण से पढ़ाई मे कमजोर रहने वाले बच्चों की एकाग्रता भी बढ़ती है और वह अपनी शिक्षा को लेकर संवेदनशील हो जाते हैं और उनमें जीवन में कुछ बड़ा करने की भावना उत्पन्न होती है। वह कहते हैं कि बच्चों की मुस्कुराहट ही उन्हें इस तरह के शिविर आयोजित करने की प्रेरणा देती है।