नई शिक्षा नीति में गुणवत्ता, बराबरी, जवादेही पर फोकस
 
नये शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने चार्ज लेते ही जारी किया नई शिक्षा नीति की ड्राफट रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय करने का प्रस्ताव
ड्राफट रिपोर्ट पर आम जनता से 30 दिन तक मांगी राय आम जनता व सभी राज्यों की राय के बाद केबिनेट में होगी पेश
 
नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता, बराबरी, जवादेही तथा आम जनता तक शिक्षा की पहुंच पर फोकस  किया गया है और ढांचागत सुधार के लिये सुझाव दिये गये हैं। अंडर ग्रेज्युट एजुकेशन को  3 वर्ष से बढ़ाकर स्वैच्छिक आधार पर 4 वर्ष करने तथा शिक्षण को लेकर भी व्यापक सुधार की सिफारिश की गई है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज मानव संसाधन मंत्रालय में पद ग्रहण करने के तत्काल बाद नई शिक्षा नीति का ड्राफट आम जनता के लिये जारी किया।
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार की शाम पद ग्रहण करने के तत्काल बाद विभाग के अधिकारियों की बैठक ली तथा नई शिक्षा नीति का ड्राफट आम जनता के लिये जारी किया। नई शिक्षा नीति को अगले 20 वर्ष के लिये तैयार किया गया है और इसमें शिक्षा की प्रत्येक वर्ग तक उपलब्धता, जवाबदेही, गुणवत्ता पर विशेष फोकस  किया गया है।  नई शिक्षा में ऐसी राष्ट्र केंद्रित शिक्षा पण्राली की बात की गई है जिसमें शिक्षा की उच्च गुणवत्ता के साथ समाज व राष्ट्र कोबदलने की परिकल्पना की गई है। नई शिक्षा नीति का मसौदा प्रख्यात  शिक्षा विद डा.के.कस्तुरीरंगन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति ने तैयार किया है। इस समिति ने मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर  शिक्षा मंत्रालय करने की भी सिफारिश की है। 
नई शिक्षा नीति के मसौदे में स्कूली शिक्षा में चाइल्ड केयर एंड एजुकेशन को पाठयक्रम कर हिस्सा बनाने का प्रस्ताव है।  समिति ने शिक्षा का अधिकार अधीनियम में 3 से 18 वर्ष के बच्चों को शामिल करने की सिफारिश की है। बच्चों के संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास के चरणों के आधार पर 5 + 3 + 3 + 4 पाठ्यक्रम की सिफारिश की है जिसके तहत  स्कूलों को बच्चों की आयु के अनुसार व्यवस्स्थित करने की बात है। नई शिक्षा नीति के मसौदे में यह स्पष्ट किया गया है कि सीखने की प्रक्रिया में कोई अलगाव ना हो तथा कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा आदि विषय भी पाठयक्रम का हिस्सा होंगे। 

नई शिक्षा नीति में छात्रों की मुख्य क्षमताओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश की गई है और इसी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा को बदलने की बात की गई है। समिति का मानना है कि व्यावसायिक और शैक्षणिक शिक्ष्ज्ञा का एकीकरण हो साथ ही भाषाओं के चुनाव में  भी लचीलापन हो। मसौदे में प्रत्येक  राज्य में राज्य विद्यालय नियामक प्राधिकरण स्थापित करने का प्रस्ताव है यह प्राधिकरण स्कूलों को मान्यता के लिये स्कूलों की   गुणवत्ता मूल्यांकन करेगा। मसौदे में यह प्रस्तावित है कि स्कूल शिक्षा निदेशालय पूरे स्कूली शिक्षा के लिए सभी शैक्षणिक मामलों का नेतृत्व करने के साथ साथ सार्वजनिक स्कूलों, एससीईआरटी को चलाएगा और बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन प्रमाणित करेगा लेकिन पाठ्यक्रम या पाठ्य पुस्तकों के निर्धारण में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी।

अंडर ग्रेज्युएट शिक्षा में मौजूदा 3 वर्षीय पाठयक्रम को स्वैच्छिक आधार पर 4 वर्षीय करने का भी प्रस्ताव नई शिक्षा नीति में है। मसौदे में कहा गया है कि 4 वर्षीय कोर्स से छात्र छात्राओं को व्यापक स्तर पर अनुसंधान का मौका मिलेगा। इसके अलावा  शिक्षकों के लिये 4 वर्षीय एकीकृत बीएड को न्यूनतम डिग्री बनाने की बात की गई है। उच्च शिक्षा में तीन प्रकार के उच्च शिक्षा संस्थानों का पुर्नगठन करने का प्रस्ताव है