उप्र के 55000 स्कूलों में बिजली कनेक्शन ही नहीं

 

  • पोलिंग बूथों के लिए विद्युतीकृत स्कूलों के चयन के निर्देश के बाद खुली पोल
  • शिक्षा विभाग की उदासीनता से बिना बिजली गर्मी में परेशान हो रहे बच्चे

उत्तर प्रदेश में सभी पात्र उपभोक्ताओं को सौभाग्य योजना के तहत निशुल्क बिजली कनेक्शन दिये जा रहे है लेकिन शासकीय उदासीनता के कारण प्रदेशभर में 55 हजार प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूल के विद्यालयों में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। 
     गत 1 मार्च को भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव सामान्य निर्वाचन 2019 की तैयारी बैठक की गयी और सभी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पोलिंग बूथ बनाये जाने के मद्देनजर निर्देश दिये गये। ऊर्जा विभाग द्वारा जब उस दिशा में कार्रवाई शुरू की गयी तो यह बड़ा खुलासा हुआ कि प्रदेश में लगभग 55 हजार प्राइमरी/जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों के भवनों में अभी तक विद्युत कनेक्शन ही नहीं है। जिसके लिए प्रमुख सचिव, ऊ र्जा द्वारा यह निर्देश दिये गये है कि अविलम्ब शिक्षा विभाग से धन प्राप्त कर बिजली कनेक्शन देने के लिए अभियान चलाया जाए। ऊ र्जा विभाग ने समस्त जिलाधिकारियों व शिक्षा विभाग को उचित कदम उठाने के लिए इस पत्र की कापी भी भेजी गयी है। सवाल यह उठता है कि शिक्षा विभाग कहां सो रहा था जब पूरे प्रदेश में हर घर में बिजली कनेक्शन देने का अभियान चल रहा था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से शिक्षा विभाग अपने छात्रों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए साल भर बड़ी-बड़ी बातें करता है। वहीं 55 हजार स्कूलों में लाखों बच्चे बिना लाइट व पंखों के पढ़ाई कर रहे हैं। आजादी के इतने दिनों बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त करने वाले हमारे देश के होनहारों के लिए शिक्षा विभाग का यह उदासीन रवैया शोचनीय है। जहां बिजली कम्पनियां पावर फार आल के तहत हर घर को बिजली देने का अभियान चला रही थी उनके द्वारा भी समय रहते यह संवेदनशील मामला इंगित किया गया होता तो आज ज्यादा उचित होता। राज्य उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के सभी प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूलों में बिजली कनेक्शन कराये जाने की मांग की है।