झारखंड में शिक्षकों की कमी दूर करने को प्रयासरत : द्रौपदी

हजारीबाग। झारखंड की राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू  ने आज कहा कि वह राज्य में शिक्षकों की कमी दूर करने एवं शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
    श्रीमती मुर्मू ने यहां के. बी. महिला महाविद्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि मैं शिक्षकों की कमी को दूर करने और शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए पूर्णत: प्रयासरत हूं। छात्रहित में तत्काल अतिथि शिक्षकों को रखा गया है, वहीं आधारभूत संरचनायें भी विकसित हो रही है। इसके लिए मैं राज भवन में निरंतर कुलपतियों, विविद्यालय के अधिकारियों एवं शिक्षा विभाग, वित्त विभाग, भू-राजस्व विभाग समेत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ समीक्षा बैठक करती हूं।
    कुलाधिपति ने विभिन्न जटिलताओं को दूर कर शिक्षा हित में अच्छा करने के लिए सभी से आग्रह करते हुये कहा कि विद्यार्थी ही भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें छात्र-छात्राओं के भविष्य की काफी चिंता है लेकिन विद्यार्थियों का भी कर्तव्य है कि वह अच्छा करें। 

            श्रीमती मुर्मू  ने कहा कि छात्राएं अपनी प्रतिभा से राष्ट्र को गौरवान्वित कर रही हैं। आज छाएं एक कुशल चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षाविद्, प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी बनने के साथ ही खेल में भी अपनी प्रतिभा से अमिट पहचान कायम की है। इसलिए, जो आज भी महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी विचार रखते हैं, उन्हें अपने विचारों पर चिन्तन और मंथन करने की आवश्यकता है।
       राज्यपाल ने कहा कि छात्राओं को समझना होगा कि भूमंडलीकरण के युग में उन्हें प्रत्येक कदम आत्मविास के साथ बढ़ाना होगा ताकि राष्ट्र निर्माण में उनका सदा प्रभावी योगदान स्थापित रहें। वे किसी दया की मोहताज न रहें, उन्हें अबला न कहा जाये। वे सशक्त एवं देशभक्त नारी के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें।
       श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जहां तक बालिका शिक्षा के महत्व की बात है तो कहा गया है कि एक बालक पढ़ता है तो वह स्वयं शिक्षित बनता है लेकिन जब एक सी पढ़ती है तब पूरा परिवार एवं समाज शिक्षित होता है।