‘बाल साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उलझा युवा पाठक’

 

  • विश्व पुस्तक मेले में   परिचर्चा आयोजित  
  •   प्रकाशन विभाग ने 10 पुस्तकें जारी कीं   
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  विश्व पुस्तक मेले में प्रकाशन विभाग ने आज‘बाल साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उलझा युवा पाठक’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की।

परिचर्चा में पुस्तकों के महत्व और बच्चों पर इसके प्रभाव के बारे में विचार व्यक्त किए गए। बच्चों को अक्सर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ समय बिताते देखा जाता है। प्रौद्योगिकी बच्चे की कल्पना को सीमित कर देती है क्योंकि उपकरण में निश्चित मात्रा में ही तस्वीरें व अन्य सामग्री उपलब्ध होती है। दूसरी ओर पुस्तक बच्चे के कल्पना शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।

इस अवसर पर प्रकाशन विभाग ने 10 पुस्तकें भी जारी कीं – सरल पंचतंत्र भाग-1, बच्चों के विवेकानंद, चिलड्रेन महाभारत (अंग्रेजी में), शेखावटी की की लोक संस्कृति, हमारे समय में उपनिषद, हार की खुशी, माँ का जन्मदिन, बापू की वाणी, वेदगाथा और बाल महाभारत।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी प्रकाशन विभाग की महानिदेशक डॉ.साधना राउत तथा गणमान्य लेखकों व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। प्रकाशन विभाग की पुस्तकों को स्टॉल नं. - 125-140, हॉल नं. -10 प्रगति मैदान, नई दिल्ली से प्राप्त किया जा सकता है।