अजा, आजजा के विद्यार्थियों के लिए ‘‘आवासीय शैक्षणिक स्थान’ 


इस योजना में कक्षा एक से 12 तक पूर्ण खर्च वहन करती है ओडिशा सरकार


देश में सामान्य वर्ग की अपेक्षा अनुसूति जाति और अनुसूचित जन जाति वर्ग के पिछड़े शैक्षिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए ओडिशा सरकार ने महत्वपूर्ण कायक्रम शुरू किया है। राज्य में इस काम को ‘‘आवासीय शैक्षणिक स्थान’ के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है। यह योजना ‘‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया!’ सोच के तहत शुरू की गई है। ओडिशा में साक्षरता दर बढ़ाने तथा जनजाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नए सफलतम प्रयोग किए गए हैं। इनमें से एक प्रशसनीय कदम विशेष प्रकार के ‘‘आवासीय शैक्षणिक स्थानों’ की स्थापना है जो कि ‘‘अन्वेषा योजना’ के अन्तर्गत स्थापित किये जा रहे हैं।बिना किसी संरचना (इन्फ्रास्ट्रर) और अध्यापन कर्मियों के स्कूल खोलने की अपेक्षा ओडिशा सरकार ने एक विशेष प्रकार के जनजाति छात्रावास प्रमुख शहरों में स्थापित किए हैं ताकि विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्राप्त हो सके और जनजाति के लोगों को अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहन एवं आत्मविास मिल सके। यह नई पहल अजा और अजजा विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए शहरी शैक्षिक संस्थानों (निजी सहायता प्राप्त एवं अन्य केन्द्र सरकार द्वारा प्रबन्धित स्कूल) की भागीदारी में शुरू की गई है जो शहरी केन्द्रों/जिला मुख्यालयों में कार्यरत हैं। इनमें अंगुल, बारगढ़, बोलनगीर, देवगढ़, गंजम, गजापति, कालाहांडी, कंधमाल, केयोन्जहार, कोरापत, माल्कनगिरी, मयूर भंज, नोवरंगपुर, नुवापाडा, राजयगढ, संभलपुर, और सुन्दरगढ़। यह योजना वर्ष 2015-16 और अकादमिक सत्र 2015-16 में लांच की गई तथा इसमें अब तक 2684 अजा/अजजा विद्यार्थियों का नामांकन किया जा चुका है। निजी स्कूलों में अजा/जजा श्रेणी के बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत 25 प्रतिशत कोटा आरक्षित किया गया है।