आईजीएनसीए में गीत,संगीत,नाटक व कलाओं का जादू
 
आईजीएनसीए ने आयोजित किया 31वां स्थापना दिवस समारोह
 
नई दिल्ली। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के 31वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में गीत, संगीत व कलाओं का जादू दिखाई दिया। इस दौरान जहां एक अखिल रात्रि संगीत सभा में दर्शक झूम उठे तो वहीं नाटक मंचन , प्रदर्शनी तथा प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया। 
        इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ0 सत्यपाल सिंह (माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय) ने आईजीएनसीए द्वारा प्रकाशित विविध प्रकाशनों का लोकापर्ण तथा "दिव्य महाकपि हनुमान" प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, इस दौरान केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, राम बहादुर राय एवं सच्चिदानंद जोशी उपस्थित रहे ।  
          आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने इस अवसर पर कहा कि “पिछले वर्ष से हम केंद्र के स्थापना दिवस के अवसर पर 2 या तीन दिन का समारोह आयोजित कर रहे हैं जिसमें हम विविध कार्यक्रमों का संयोजन कर रहे हैं, हमने अपने 30वें स्थापना दिवस से रात भर चलने वाली ‘अखिल रात्रि संगीत सभा’ का आयोजन शुरू किया था। इस बार हमने अखिल रात्रि संगीत सभा की दूसरी कड़ी का आयोजन किया है ताकि  दिल्ली व आस पास के संगीत प्रेमी फिर से रात भर चलने वाले संगीत आयोजनों का लुत्फ उठा सकें।  
 
           तीन दिन चले इस स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय [पाण्डुलिपि मिशन के तत्त्वाधन मेन आयोजित संगोष्ठी "पाण्डुलिपि विज्ञान: भावी संभावनाएं" से हुआ जिसमें पाण्डुलिपि से जुड़े विद्वानों ने अपने मत रखे। इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ बुद्धरशिम मणि बतौर मुख्य अतिथि व बी.एल. इंस्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी के निदेशक डॉ गया चरण त्रिपाठी मौजूद रहे। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने इस संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए कहा कि "आज जरूरत है कि हम पाण्डुलिपि व उनके शोध के विषय में युवा पीढ़ी को जागरूक करें"।
             केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय ने केंद्र में स्थायी वैदिक गॅलेरी का उद्घाटन किया, इस गॅलेरी का उद्देश्य दर्शकों को वैदिक काल से रूबरू करवाना है।
         स्थापना दिवस समारोह के पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला मे पहली प्रस्तुति रही सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका विदुषी कलापिनी कोंकली एवं भुवनेश कोंकली की। जिसमें उन्होने ‘मालव रंग’ कार्यक्रम के तहत मालवा प्रांत के शास्त्रीय गीतों कि प्रस्तुति दी । 
                    दर्शकों एवं श्रोता की दृष्टि से इस समारोह का सबसे मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा “अखिल रात्रि संगीत सभा”। दिल्ली मे वर्षों बाद रात भर चलने वाली ऐसी संगीत सभा का आयोजन किया केंद्र द्वारा किया गया । जिसमें कई नामचीनी संगीतज्ञों ने श्रोता के रूप मे भाग लिया साथ ही युवा पीढ़ी ने अपनी अच्छी ख़ासी उपस्थिती दर्ज़ करवायी। इस संगीत सभा का शुभरम्भ दक्षिण भारतीय शैली के गायक श्री अभिशेख रघुराम के गायन से हुआ जिसमे उन्होने विविध रागों कि प्रस्तुति दी, उन्होने श्यामा शास्त्री कि सुप्रसिद्ध बदिश भी गायी। इसके बाद युवा सरोद वादक अयान अली बंगश ने सरोद पर राग दरबारी कि तान छेड़ी, उन्होने राग गौड़ मल्हार भी बजाया अपनी आखिर प्रस्तुति में उन्होने राग किरवानी से की। इसके बाद आरती  अंकलिंकर ने अपना गायन शुरू किया। 
           रात 3 बजे जब पंडित सुरेश तलवलकर अपने शिष्यों के साथ मंच पर आए तो हल्की नींद के झोंखों से झुझ रहे श्रोताओं को उन्होने तबले व अन्य वाद्यों के मिश्रण से प्रस्तुत फ्यूजन से तरोताजा कर दिया । मुंबई से आए युवा सितार वादक पुरबयन चटर्जी ने सितार पर राग ललित व नट भैरव कि प्रस्तुति दी । अखिल रात्रि संगीत सभा कि आखिरी प्रस्तुति उस्ताद इकबाल अहमद खान कि थी जिसमे उन्होने दो भक्ति रस पर आधारित बन्दिशों को गाया व तुलसी दास कि प्रसिद्ध पद " श्याम बंसी वाला, जपे तुलसी माला" उन्होने अपने गायन का समापन  'दौरंगी भैरवी से की जिसमे 12 रागो का प्रयोग किया गाया था । 
 
             स्थापना समारोह के दूसरे दिन केंद्र में एक 'कला में तकनीक' विषय पर गोलमेज़ का आयोजन किया गया जिसमे संस्कृति मंत्रालय के मुख्य सचिव श्री अरुण गोयल व 4 अन्य मंत्रालय के मुख्य सचिवों के अलावा मंत्रालय के  शीर्षस्थ अधिकारियों ने भाग लिया,  साथ ही संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ कार्य करने वाली संस्थाओं के प्रमुखों ने भी इस गोल मेज मे भाग लिया । इस गोलमेज़ का उद्देश्य कला मे कैसे तकनीकी प्रयोग कर स्किल डेव्लपमेंट पर ध्यान दिया जा कता है । साथ ही इस क्षेत्र मे कैसे और अधिक रोजगार प्रदत्त बनाया जा सकता है की चर्चा की गयी ।
          आईजीएनसीए द्वारा निर्मित फिल्म 'क्रांतिदर्शी गुरु जी' श्री रवीद्र शर्मा "गुरुजी" पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन भी स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया । केंद्र द्वारा "एवर चेंजिंग वुमेन एंड मिडिल एज डिलेमा" विषय पर आधारित एक परिचर्चा में महिला विशेषज्ञों ने अपने मंतव्य रखे ।  
          लोक कलाकार गफरुद्दीन के नेतृत्व में राजस्थान से आए लोक कलाकारों ने राजस्थानी शैली मे महाभारत काव्य पर आधारित गीतों "पांडून के कड़े" की प्रस्तुति दी । स्थापना दिवस के दूसरे दिन का कार्यक्रम का समापन एम।के। रैना द्वारा निर्देशित अँग्रेजी नाटक "महात्मा एंड द पोएट" के साथ हुआ ।  
         तीन दिनो तक चले स्थापना दिवस समारोह का समापन तीसरे दिन “मिलाद-उन-नबी” के मौके पर ‘शाम-ए-कव्वाली’ कार्यक्रम के साथ हुआ, केंद्र ने इस कव्वाली का आयोजन समारोह के आखिरी दिन “मिलाद-उन-नबी” के मौके को ध्यान मे रखते हुये किया था, जिसमे युसुफ निजामी ने अपनि प्रस्तुति दी, अपनी लगभग तीन घंटे की प्रस्तुति में उन्होने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।