अब मोबाइल पर डिटेक्टर से जांचों दूध की मिलावट
 
आईआईटी हैदराबाद   ने दूध में मिलावट जांचने के लिए मोबाइल फोन आधारित डिटेक्टर विकसित किया
 
 दूध की एसिडीटी के अनुसार रंग बदलेगा डिटेक्टर और मोबाइल फोन में लोड एल्गोरिद्म इस बदलाव के बारे में जानकारी देगा
 
 
हैदराबाद:  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद के शोधकर्ता दूध में मिलावट बताने वाले स्मार्टफोन आधारित सेंसर विकसित करने में लगे हैं। इस दिशा में पहला कदम रखते हुए उन्होंने दूध की एसिडीटी मापने के लिए एक डिटेक्टर सिस्टम का विकास किया है जिसका इंडेकिटर पेपर दूध की एसिडीटी के अनुसार रंग बदलता है। शोधकर्ताओं ने एक एल्गोरिद्म भी तैयार कर लिया है जिसे मोबाइल फोन में डाल कर रंग बदलने के बारे में सटीक जानकारी हासिल होगी।
 
इस शोध कार्य में आईआईटी हैदराबाद के इलैक्ट्रिकल इंजीयरिंग विभाग के प्रो. शिव गोविन्द सिंह के नेतृत्व में एक समर्पित टीम लगी है और इसमें आईआईटी हैदराबाद के इलैक्ट्रिकल इंजीयरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौम्य जाना एवं डॉ. शिवा राम कृष्ण वंजारी और अन्य लोग शामिल हैं। यह शोध फूड एनालिटिकल मेथड जर्नल के नवंबर 2081 अंक में प्रकाशित किया गया है।
 
शोध का महत्व बताते हुए प्रो. शिव गोविन्द सिंह ने बताया, ‘‘दूध में मिलावट जांचने के लिए क्रोमाटोग्राफी और स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी तकनीकियां उपलब्ध हैं पर इनके लिए बड़ा सेट-अप चाहिए और इनका ऐसी डिवाइसों में सूक्ष्म रूप में उपयोग नहीं कर सकते हैं जो एक आम इंसान के लिए सुलभ और सस्ता हो। इसलिए विकासशील देशों के अधिकांश उपभोक्ता मौजूदा तकनीकियों का लाभ नहीं ले सकते हैं।’’
 
प्रो. शिव गोविन्द सिंह ने बताया, ‘‘हमें आसान डिवाइस विकसित करना होगा जिसकी मदद से आम उपभोक्ता आसानी से दूध में मिलावट का पता लगा ले। एक साथ सभी मानकों पर नजर रखते हुए दूध में मिलावट का पता लगाने की इस प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं होगी और इसके लिए कीमती मशीन भी नहीं चाहिए।’’
 
इस दिशा में पहला कदम रखते हुए शोधकर्ताओं ने ‘पीएच’ (जो एसिडीटी का एक सूचक है) जानने के लिए सेंसर-चिप आधारित प्रक्रिया का विकास किया है। शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रक्रिया ‘इलैक्ट्रोस्पिनिंग’ विकसित कर पेपर जैसी मटीरियल तैयार किया है जो नायलन के नैनो साइज़ ;्10.9 एम डायमीटरद्ध फाइबरों से बना है और इसमें तीन रंगों का मिश्रण डाला गया है। यह पेपर ‘होलोक्रोमिक’ है यानी यह एसिडीटी में परिवर्तन के साथ रंग बदलेगा।
 
शोधकर्ताओं ने एक प्रोटोटाइप स्मार्टफोन आधारित एल्गोरिद्म का भी विकास किया है जिसमें फोन के कैमरे की मदद से सेंसर स्ट्रिप्स को दूध में डुबो कर उसके रंग दर्ज (कैप्चर) किए जाते हैं और डाटा को पीएच (एसिडीटी) रेंज़ में तब्दील किया जाता है। उन्होंने तीन मशीन-लर्निंग एल्गोरिद्म के प्रयोग किए हैं और इंडिकेटर स्ट्रिप्स के रंग का वर्गीकरण करने के मकसद से दूध में मिलावट जांचने में उनकी सक्षमताओं की तुलना की है। दूध में प्रदूषक तत्वों के अलग-अलग मिश्रण डाल कर जांच करने पर लगभग बिल्कुल सही वर्गीकरण (99ण्71ः तक सटीक) प्राप्त हुए हैं।   
 
इस शोध को विस्तार देते हुए आईआईटी हैदराबाद में उनकी रिसर्च टीम मिलावट का पता लगाने में मोबाइल फोन के कैमरे और लाइटिंग के प्रभावों का अध्ययन करेगी। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में वे अन्य भौतिक गुणों जैसे कंडक्टिवीटी एवं रिफ्रैक्टिव इंडेक्स जानने के लिए भी सेंसर तैयार कर लेंगे और इसे पीएच डिटेक्शन यूनिट से जोड़ देंगे ताकि दूध की गुणवत्ता जानने की संपूर्ण प्रक्रिया उपलब्ध हो और उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन और हाथ से उपयोग वाले ऐसे अन्य डिवाइस से आसानी से इसका लाभ ले सकें।
 
भारत में दूध में मिलावट एक गंभीर समस्या है। पशु कल्याण बोर्ड की हाल की रिपोर्ट से जाहिर है कि देश के 68ण्7 : दूध और दूध उत्पाद (बाई-प्रोडक्ट) में डिटर्जेंट, ग्लूकोज़, यूरिया, कॉस्टिक सोडा, व्हाइट पेंट और तेल जैसी चीज़ों की मिलावट है। दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए लोग फॉर्मेलिन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, बोरिक एसीड और एंटीबायटिक्स भी दूध में मिलाते हैं।
 
दूध में मिलावट जांचने की प्रचलित प्रक्रिया इसमें मौजूद रसायनों का विश्लेषण करना है जो अपने-आप में एक जटिल कार्य है। प्रो. शिव गोविन्द सिंह के शोध समूह का लक्ष्य दूध के जैवभौतिक गुणों में आए बदलावों का पता लगा कर दूध में मिलावट की जानकारी सामने रखना है और इसके बारे में पहले ही उनके कार्य ‘जर्नल ऑफ फूड कैमिस्ट्री’ में प्रकाशित हैं। दूध में अतिरिक्त मिलावट से आम तौर पर एसिडीटी, विद्युत चालकता एवं रिफ्रैक्टिव इंडेक्स (मटीरियल से प्रकाश का गमन) जैसे जैवभौतिक बदलाव आते हैं।
 
उदाहरण के तौर पर डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा या बोरिक एसीड की मिलावट से दूध जरूरत से ज्यादा या कम एसिडिक हो जाता है। दूध में यूरिया डालने से उसकी विद्युत चालकता बदल सकती है। इसी तरह चीनी, पानी और यूरिया की मिलावट से दूध के रिफ्रैक्टिव इंडेक्स बदलने के परिणाम सामने आए हैं।