कई मायनों में खास रहा आईजीएनसीए का ‘गांधी पर्व’

नई दिल्ली। गाँधी जयंती के अवसर पर देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों की धूम रही, जहां एक ओर पूरा देश राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी को उनके जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि देने मे  जुटा था वहीं दूसरी और इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र 2 अक्तूबर से 8 अक्तूबर तक बापू के 150 वें जन्मवर्ष के उपलक्ष एक अनूठे कार्यक्रम ‘गाँधी पर्व’ का आयोजन कर रहा था । इस गाँधी पर्व का शुभारंभ हुआ 2 अक्तूबर को राजघाट से जिसमें इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के न्यासी डॉo महेश शर्मा, अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय एवं सदस्य सचिव डॉo सच्चिदानंद जोशी ने राजघाट से “हुनर ख़ोज यात्रा: कारीगर संपर्क, संवाद एवं सहभाग” का शुभारंभ किया। इस यात्रा के माध्यम केंद्र देश के 6 क्षेत्रों में जाकर कारीगरों के साथ संपर्क कर उनकी जानकारी एकत्रित कर, फरवरी 2019 में ‘बा’ की जयंती के अवसर पर दिल्ली में वृहद कारीगर सम्मेलन का आयोजन करेगा ।
        केंद्र के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि “गाँधी पर्व के माध्यम से हम गाँधी जी व उनके संदेश को अलग माध्यम व अलग ढंग से लोगों के सामने प्रस्तुत करना चाहते थे, इसलिए हमने अलग तरह के कार्यक्रम का संयोजन पर संयोजन किया है। 6 दिन तक चले इस पर्व में बच्चों के लिए कथा-कथन, रंगमंच, क्राफ्ट, उर्दू में कथा-कथन “दास्तान ए गाँधी”, दृष्टिहीन लोगों के लिए स्पर्श कार्यशाला, विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, प० बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु व कश्मीर आदि के लोक गीत, चर्चा सत्र, शास्त्रीय गायन-वादन व प्रदर्शनियों आदि का आयोजन किया गया था।“

‘गाँधी पर्व’ की शुरुआत ‘एक्सैस फॉर ऑल’ संस्था के माध्यम से आईजीएनसीए ने दृष्टिहीन बच्चों के लिए “गाँधी – एक स्पर्श” कार्यशाला से हुई, जिसमें सिद्धांत शाह ने दृष्टि बाधित बच्चों को ब्रेल लिपि और और गाँधी जी की मूर्ति, चश्मे, चरखे आदि के द्वारा उनको गाँधी जी व उनके जीवन व संदेश के बारे में बताया, इसके बाद शाम को गाँधी जी के जीवन से जुड़ी घटनाओं व कहानियों पर आधारित “दास्तान ए गाँधी’ कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी जिसमें फ़ौजिया दास्तानगो ने बच्चों को उर्दू में गाँधी जी से रूबरू करवाया । गाँधी पर्व के दूसरे दिन नील डोगरा द्वारा बच्चों के लिए रंग मंच कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को अभिनय के गुर सिखाने के साथ-साथ, गाँधी जी के बचपन से जुड़ी घटनाओं के माध्यम से उन्हें अभिनय करवाकर समझाया गया। जहां एक ओर बच्चों ने रंगमंच के माध्यम से गाँधी जी को समझा वहीं दूसरी ओर कुछ बच्चों ने क्राफ्ट वर्कशॉप में उनकी पादुकाओं, स्लोगन, चसमें को बनाकर गाँधी जी को समझा।   

भारत का लोक-संगीत बेहद रोचक व आम जन-जीवन से जुड़ा रहा है और भारतीय लोक गीतों में गाँधी जी, सत्याग्रह आंदोलन आदि का जिक्र भी बखूबी किया गया है । इस बात को ध्यान में रखते हुये आईजीएनसीए ने देशभर के कुछ ऐसे राज्यों जैसे राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिल नाडु, काश्मीर के लोक कलाकारों को केंद्र में आमंत्रित किया जो गाँधी जी, अहिंसा, सत्याग्रह आंदोलन, स्वतन्त्रता आंदोलन पर केन्द्रित लोक गीतों की प्रस्तुति दे सकें । भोजपुरी लोक गीतों में स्वतन्त्रता संग्राम, गाँधी, खादी, आदि का बखूबी जिक्र किया गया है इस बात को ध्यान मे रखते हुये आईजीएनसीए ने बिहार से दो सुप्रचीत लोक कलाकारों सुश्री विजया भारती व सुश्री शैलेश श्रीवास्तव को केंद्र में उन लोक गीतों को प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया था ।  

जहां लोक कलाओं में गाँधी जी ने अपनी जगह बनाई है वहीं उनकी शास्त्रीय संगीत में भी पहुँच रही है, गाँधी पर्व के दौरान शास्त्रीय संगीत के माध्यम से आईजीएनसीए ने ऐसे रागों के गायन का संयोजन किया था जिनकी रचना गाँधी जी को केन्द्रित करके की गयी थी, इस शृंखला की पहली प्रस्तुति में विदुषी कलापीनि कोमकली ने उनके पिता पंडित कुमार गंधर्व द्वारा रचित ‘गाँधी मल्हार’ गाया। कुमार गंधर्व जी ने गांधी जी के जन्म शताब्दी वर्ष समिति के आग्रह पर इस राग की रचना की थी। इसके बाद के कार्यक्रमों में पंडित बिसवजित रॉय चौधरी ने सरोद वादन किया जिसमें उन्होने उस्ताद अमजद अली खान द्वारा रचित राग ‘बापू कोंस’ बजाया । दक्षिण भारतीय संगीत की युवा गायिका जोड़ी “अपूर्वा व अनहिता” बहनों ने अपने गुरु रविकिरन द्वारा रचित व गाँधी जी को समर्पित “राग मोहिनी” गाया। इसके उपरांत पंडित शुभेन्द्र राव ने सितार पर राग ‘मोहन कोंस” बजाया, जिसकी रचना उनके गुरु पंडित रवि शंकर ने 1849 में गाँधी जी की हत्या के बाद किया था ।

आईजीएनसीए ने अपनी ट्विन आर्ट गॅलेरी में शैली ज्योति द्वारा कल्पित प्रदर्शनी “रीविजिटिंग गांधी” प्रदर्शनी का आयोजन किया है जिसका उद्घाटन श्रीमती स्मृति ईरानी, माननीय केन्द्रीय मंत्री, वस्त्र मंत्रालय ने किया। यह प्रदर्शनी दर्शकों के लिए 21 अक्तूबर तक खुली रहेगी।

आईजीएनसीए ने प्रकाशन विभाग, भारत सरकार के साथ मिलकर एक चर्चा सत्र ‘संगोष्ठी-गाँधी दर्शन: प्रकाशन और लोक सम्पर्क' का आयोजन भी किया साथ ही गाँधी जी पर केन्द्रित साहित्य आदि की प्रदर्शनी भी लगाई गयी ।