मणिपुर में राष्ट्रीय खेलकूद विविद्यालय के विधेयक को संसद की मंजूरी  
 
नयी दिल्ली, नौ अगस्त   मणिपुर में 524 करोड़ रुपये की लागत से देश के पहले राष्ट्रीय खेलकूद विविद्यालय की स्थापना के प्रावधान वाले एक विधेयक को आज संसद की मंजूरी मिल गयी।
  राज्यसभा ने आज इस विधेयक को संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया। लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। राष्ट्रीय खेलकूद विविद्यालय विधेयक 2018 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए खेल और युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धनंिसह राठौड़ ने कहा कि इस विधेयक के तहत मणिपुर में स्थापित खेलकूद विविद्यालय में केवल शारीरिक और खेल शिक्षा नहीं बल्कि खेलों के समस्त आयामों को संचालित किया जाएगा।
उन्होंने कहा ‘‘इस विस्तरीय संस्थान में न सिर्फ स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की पढाई होगी बल्कि संस्थान में खेलों के क्षेत्र में अनुसंधान की भी सुविधा होगी।
         राठौड़ ने कहा कि सारे पाठ्यक्रम मणिपुर परिसर में संचालित किये जाएंगे। इसके क्षेत्रीय केंद्र देश में विभिन्न राज्यों और विदेशों में भी खोले जा सकेंगे। इसमें शैक्षणिक कार्यक्रमों और अनुसंधान के अतिरिक्त विविद्यालयों एवं इसके दूरस्थ केंद्रों में उत्कृष्ट खिलाड़ियों, खेलकूद पदाधारियों, रेफरियों और अम्पायरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  विविद्यालय को विस्तरीय बनाने के लिये भारत सरकार द्वारा आस्ट्रेलिया के दो विविद्यालयों : कैनबरा विविद्यालय तथा विक्टोरिया विविद्यालय : के साथ पाठ्यचर्या अनुसंधान सुविधाओं और प्रयोगशालाओं के विकास के लिये सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विविद्यालय का कुलपति कोई प्रतिष्ठित खिलाड़ी होगा और इसकी अकादमिक परिषद में भी ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी होंगे जो पाठ्यक्रमों में मार्गदर्शन देते रहेंगे। राठौड़ ने कहा कि खेलों के विकास और शिक्षण प्रशिक्षण में पैसे की कोई कमी नहीं हो, इसके लिये निजी क्षेत्र को कापरेरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत सहायता देने का प्रावधान होगा। साथ ही निजी खेल अकादमियों को भी सरकारी खेल संस्थानों के साथ जोड़ने का प्रावधान किया है।
  राठौड़ ने कहा ‘‘अगस्त 2017 में विधेयक लाया गया था और जनवरी में मणिपुर परिसर में पाठ्यक्रम शुरू कर दिये गये। बजट सत्र में सदन में कामकाज नहीं हो पाने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका, इसलिए अध्यादेश लाना जरूरी हो गया था ताकि छात्रों का कोई नुकसान नहीं हो।
  उन्होंने बताया कि खेल प्रतिभाओं को आर्थिक परेशानियों से उबारने के लिये सरकार ने विभिन्न मदों में दी जाने वाली सहायता राशि में इजाफा किया है। साथ ही स्थानीय कोच को विदेशी कोच की तुलना में कम पैसा देने की व्यवस्था में बदलाव कर इनके भत्तों में शत प्रतिशत इजाफा किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘खेलो इंडिया’ मुहिम के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे है।
 उन्होंने सरकार द्वारा एक मोबाइल एप भी विकसित कराने की जानकारी दी। इसकी मदद से अभिभावक अपने बच्चों के लिए खेल सुविधाओं की जानकारी लेने की खातिर पता कर सकेंगे कि ‘‘कहां खेलें, कैसे खेलें। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की। यह विधेयक इस संबंध में 31 मई को राष्ट्रपति द्वारा लागू अध्यादेश की जगह लेगा।  इससे पहले विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा में हिस्सा लेते हुये मनोनीत सदस्य और ओलंपिक पदक विजेता मेरी कॉम ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह विविद्यालय स्थापित होने से खेल प्रतिभाओं को बढावा मिलेगा।  उन्होंने कहा ‘‘ऐसी पहल से गांव और दूरदराज के इलाकों में छुपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय फलक पर उभरने का मौका मिलेगा।’’  उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय खेलकूद विविद्यालय विधेयक 2017 को 10 अगस्त 2017 को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन यह पारित नहीं हो पाया था। चूंकि संसद सत्र में नहीं थी और अत्यावश्यक विधान बनाना अपेक्षित था, इसलिये 31 मई 2018 को राष्ट्रीय खेलकूद विविद्यालय अध्यादेश 2018 लागू किया गया था ।  
तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। जनता दल यू की कहकशां परवीन ने कहा कि देश ने खेलों के क्षेा में पर्याप्त उपलब्धि हासिल नहीं की है। ऐसे विविद्यालय देश के अन्य हिस्सों में भी खोले जाने चाहिए। तेलंगाना राष्ट्र समिति के बांडा प्रकाश ने कहा कि पूरे भारत में खेल परिसर बनाए जाने चाहिए जिससे युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सके। असंबद्ध रीताब्रत बनर्जी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि खेलों में अधिक से अधिक निवेश करना चाहिए। कोलकाता में राष्ट्रीय फुटबाल अकादमी स्थापित करनी चाहिए। 
      वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विजय साई रेड्डी ने कहा कि खेलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की जरुरत है। आम आदमी पार्टी के सुशील कुमार गुप्ता ने कहा कि खेलों के लिए बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की जानी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के हषर्वर्धन सिंह डुंगरपुर ने कहा कि किशोर व्यवस्था में खिलाड़यिों की पहचान की जानी चाहिए।