कला व संस्कृति में भारत के प्राण : सोनल मानसिंह
 
नई दिल्ली। पदमविभूषण व प्रख्यात कलाकार डा. सोनल मानसिंह का कहना है कि कला एवं संस्कृति भारत कि धरोहर है इसमे भारत के प्राण बसते हैं। उन्होंने कहा कि कला व संस्कृति से ही देश को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। 
         पद्मविभूषण डॉ सोनल मानसिंह को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत करने के उपलक्ष में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने अपने सभागार में उनके स्वागत मे सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमे कला जगत के विशिष्ट अतिथियों ने शिरकत की, जिनमें राज्य सभा के नव नामित सदस्य माननीय राम सकल, डॉ गीता चंद्रन, आर.के उषा, अमीरचंद, पंडित शुभेन्द्र राव, डॉ भारत गुप्त, नलिनी-कमलिनी आदि मौजूद थे | केंद्र के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने उन्हे शाल औढ़कर सम्मानित किया |
       डॉ जोशी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि “ये हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है सरकार ने बड़े लंबे समय के बाद कला क्षेत्र से किसी कलाकार का नाम राज्य सभा के लिए मनोनीत किया है, और हमारे लिए ये इसलिए और अधिक महत्वपूर्ण है कि सोनल जी हमारे केंद्र कि न्यासी सदस्य भी हैं | सोनल जी को सरकार राज्य सभा में नामित करने से दो संदेश स्पष्ट जाते हैं एक ये कि सरकार ने कला एवं संस्कृति के महत्व को समझा है, दूसरा ये कि सत्ता ने नारी शक्ति को स्वीकार किया है |”
      अपने सम्मान मे आयोजित कार्यक्रम में डॉ सोनल मानसिंह  कहा कि “कला एवं संस्कृति ही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा देश को एक सूत्र मे बांधे रखा जा सकता है । काफी समय से यह देश मे यह महसूस किया जा रहा था कि कला संस्कृति को जैसे एक किनारे कर दिया गया हो लेकिन मुझे कला एवं संस्कृति कि बात रखने के लिए राज्य सभा के लिए नामित किया गया है मेरे लिए ये बड़े गर्व कि बात है इसलिए कि सरकार ने बड़े वर्षों के कला एवं संस्कृति के क्षेत्र से किसी को राज्य सभा के लिए मनोनीत किया है, कला एवं संस्कृति भारत कि धरोहर है इसमे भारत के प्राण बसते हैं और यह उसका सम्मान है न कि मेरा । मेरा इस सभागार मे बैठे सभी कला मनीषियों से आग्रह है कि मुझे अपने सुझाव दें ताकि मैं सदन मे आपकी भारतीय कला एवं संस्कृति कि आवाज बन सकूं।