दो हजार तदर्थ शिक्षकों की नौकरी पड़ सकती है खतरे में

डीयू ने मांगा विभाग स्तर का रोस्टर
20 जुलाई को सत्र के पहले दिन होनी है पुनर्नियुक्तिकॉलेजों में 4500 तदर्थ शिक्षक कर रहे काम कॉलेजों का फैसला डीयू से मांगेंगे गाइडलाइंस

दिल्ली विविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों के तदर्थ शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। दरअसल विविद्यालय प्रशासन ने यूजीसी के पत्र के आधार पर कॉलेजों से विभाग स्तर पर रोस्टर मांगे हैं। 20 जुलाई को कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र 2018-19 के पहले दिन तदर्थ शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति होनी है। ऐसे में यदि विभाग स्तर पर रोस्टर लागू होते हैं तो करीब 2 हजार तदर्थ शिक्षक बाहर हो सकते हैं। इस मामले में बृहस्पतिवार को तदर्थ शिक्षकों ने बैठक कर विरोध जताया तो कॉलेज प्राचायरे ने बैठक कर तय किया कि इसको लेकर विविद्यालय से गाइडलाइंस मांगेगे। क्या है मामला : डीयू ने यूजीसी के पत्र के अनुसार 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को लागू करने को कहा गया था। 13 प्वाइंट रोस्टर विभाग स्तर का रोस्टर होता है, जिसमें विभाग स्तर पर पदों की गणना होती है। अभी तक डीयू से सम्बद्ध कॉलेजों में 200 प्वाइंट आधारित रोस्टर लागू है, जो कॉलेज स्तर पर होता है। यदि कॉलेजों में विभाग स्तर पर रोस्टर लागू होता है तो कॉलेजों में आरक्षित वर्ग के पदों की घटने की स्थिति बन रही है। डीयू ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए यूजीसी के पत्र के आधार पर कॉलेजों से विभाग स्तर का रोस्टर मांग लिया। कॉलेज डीयू से मांगेगे गाइडलाइंस : इस मुद्दे को लेकर कॉलेजों के प्राचायरे की एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को बैठक कर तय किया कि इस मामले में डीयू से गाइडलाइंस मांगेगे। 20 जुलाई को तदर्थ शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति होती है और उसी दिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। बताया जाता है कि अभी कॉलेजों द्वारा रोस्टर डीयू स्तर पर स्वीकृति होना है। ऐसे में कॉलेज असमंजस में हैं कि कैसे तदर्थ शिक्षकों की रीज्वाइनिंग होगी। संभावना है जब तक इसको लेकर फैसला नहीं होता है तो मौजूदा तदर्थ शिक्षकों की कॉलेजों में रीज्वाइनिंग हो सकती है। मामले को लेकर विरोध : इस मामले में तदर्थ शिक्षकों ने विरोध जताया है। डीयू कार्यकारी सदस्य डॉ राजेश झा ने कहा कि डीयू कॉलेजों में 200 प्वाइंट कॉलेज स्तर का रोस्टर न सिर्फ सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है, बल्कि वैधानिक रूप से बाध्यकारी है। हम रोस्टर से किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि कॉलेज खुलने के पहले दिन 20 जुलाई को मौजूदा तदर्थ शिक्षकों को ज्वाइन कराया जाए और उनके समायोजन की लड़ाई तेज की जाएगी। डीयू के विद्वत परिषद के सदस्य डॉ पंकज गर्ग ने कहा कि यूजीसी पत्र को लेकर डीयू ने विद्वत और कार्यकारी परिषद की बैठक नहीं बुलाई। डॉ गर्ग ने कहा कि जब तक इस मामले में फैसला नहीं होता है, तब तक मौजूदा तदर्थ शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति की जाएगी। तदर्थ शिक्षकों को कहना है कि डीयू प्रशासन ने सीधे कॉलेजों को विभाग स्तर पर रोस्टर बनाने को कह दिया है। यदि यह रोस्टर लागू होता है तो कॉलेजों में काम कर रहे करीब 4500 हजार तदर्थ शिक्षकों में आरक्षित पदों पर काम कर रहे करीब 2 हजार शिक्षक नौकरी से बाहर हो जाएंगे।