अल्पसंख्यक इलाकों में स्कूल खोलने की सिफारिश  
 
 अल्पसंख्यकों की संस्कृति को पाठ्यक्रम में उचित जगह दी जाये 
 
         नयी दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में स्कूल खोलने और उनकी संस्कृति को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की सिफारिशें की हैं ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव और उन्हें परेशान करने जैसी समस्याओं का समाधान हो सके।
     एनसीईआरटी ने यह सुझाव भी दिया है कि स्कूलों में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े पर्व - त्योहार मनाए जाएं। परिषद द्वारा तैयार किए गए नियमावली के मसौदे के मुताबिक , ‘‘ अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव और उन्हें परेशान किए जाने के मामलों के अलावा अल्पसंख्यक बच्चों को कुछ और तरह के भेदभाव से गुजरना पड़ता है , जैसे - स्कूल या कक्षा का अलग माहौल , सांस्कृतिक एवं धार्मिक वर्चस्व। ’’ एनसीईआरटी ने यह सिफारिश भी की है कि सभी शिक्षकों को सांस्कृतिक एवं धार्मिक विविधता , खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों के मामले में , के मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाए।  अपनी सिफारिशों में एनसीईआरटी ने कहा है , ‘‘ स्कूल की प्रार्थना सभाओं और तस्वीरों में कभी - कभी अल्पसंख्यकों के बच्चों को देवी - देवताओं की तस्वीरें दीवारों पर दिखते हैं जो उनके लिए सहज माहौल नहीं होता। ’’ एनसीईआरटी ने कहा , ‘‘ कभी - कभी एक या दूसरे समुदाय द्वारा खानपान की आदतों पर टिप्पणियां ठेस पहुंचाने वाली पाई जाती हैं। समुदाय के कुछ सदस्य अलग यूनिफॉर्म को अवांछित मानते हैं। ’’ परिषद ने सिफारिश की कि पाठ्यक्रम में अल्पसंख्यकों की संस्कृति को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। नियमावली के मुताबिक , मुस्लिम बहुल इलाकों में उर्दू माध्यम के स्कूल स्थापित किए जाने चाहिए जिसमें भाषा माध्यम बच्चों की मातृभाषा को बनाया जा सकता है।     एनसीईआरटी ने कहा , ‘‘ उर्दू को दूसरी भाषा के तौर पर सीखने का विकल्प सुनिश्चित किया जाना चाहिए और ऐसे स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की उपलब्धता होनी चाहिए। ’