विवि कोर्सेज में दलित साहित्य को शामिल करने की मांग की लेखको ने
 
 सवर्ण साहित्य का विकल्प दलित साहित्य ही हो सकता है। जब तक विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में दलित साहित्य को सम्मिलित नहीं किया जाता तब तक साहित्य और समाज का सही अनुशीलन नहीं किया जा सकता। साथ ही लेखको को यह मांग सरकार से करनी चाहिये की उन्हें भी पुरस्कारों में भागीदारी मिलनी चाहिय। अगला साहित्य का  नोबल पुरस्कार दलित साहित्य पर ही दिया  जाना चाहिय। यही अम्बेडकर को सच्चा सम्मान होगा। ये विचार दलित साहित्यकार जयप्रकाश लीलवान  ने दलित लेखक संघ द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में दलित साहित्य की अवधारणा , संघर्ष एवं चुनौतियां विषय पर व्यक्त किये।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दलित लेखक शीलबोधी ने अपने वक्तव्य में  कहा कि अभाव के शिकार लोगों में कुछ ही लोग होते हैं जो होने वाले  सामजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हैं। अपने वक्तव्य में कवि शंभू यादव ने कहा की दलित साहित्य का उभार वर्चस्ववादी साहित्य,संस्कृति, धर्म, और समस्त सांस्थानिक सत्ताआें का विरोध करते हुए ही हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए माक्र्स और अम्बेडकर दोनों ही प्रासांगिक हैं। प्रो$ विमल थोराट ने दलित साहित्य की अवधारणा पर कहा कि दलित साहित्य ने सवर्ण सौन्दर्यशा के प्रतिगामी और इंसान विरोधी मापदंडों को नकारते हुए अपना खुद का सौन्दर्यशा गढ़ लिया है। अपने मापदंड बना लिए हैं। उन्ही मानदंडों को आधार बनाकर दलित सौन्दर्यवादी मूल्य , सवर्ण साहित्य के जातिवादी मूल्यों की पहचान कर रहें हैं। उन्होंने मांग की कि सभी विश्वविद्यालय में अनिवार्य रूप से दलित साहित्य को पढ़ाया जाना चाहिए। शिक्षक के पी सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में सभी से देशव्यापी आंदोलन करने का आह्वान किया। इस अधिवेशन में दिल्ली यूनिवर्सिटी में फिर से विद्वत परिषद् के सदस्य चुने जाने पर लेखक संघ ने  प्रो  हंसराज सुमन को सम्मानित किया। सम्मान स्वरूप उन्हें शॉल एवं प्रशस्ति पत्र भेंट किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में लेखक संघ का आभार व्यक्त किया और सामाजिक न्याय के संघर्ष को अधिक तेज करने का भरोसा दिलाया। प्रो सुमन ने कहा की लेखकों-शिक्षको और संस्तिकर्मी को एक साथ एकताबद्ध होकर ब्राह्मणवाद और अन्यायी मूल्यों का विरोध करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता  करते हुए कर्मशील भारती ने कहा कि की लेखक संघ सभी को यह विश्वास दिलाता है कि संघठन के दायरे को बढ़ाया जाएगा और सभी राज्यों में इसकी शाखाएं खोली जायेगी।