आईजीएनसीए में बॉम्बे जयश्री की बंदिशों ने समां बांधा
आईजीएनसीए में बुद्ध पूर्णिमा पर हुआ कार्यक्रम

नई दिल्ली। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आई.जी.एन.सी.ए) ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया | जिसमे 2013 में लाइफ ऑफ़ पाई फिल्म के गीत के लिए ऑस्कर के लिए नॉमिनेटेड चेन्नई की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका  बॉम्बे जयश्री ने प्रस्तुति दी | इस संगीत संध्या का संयोजन आई.जी.एन.सी.ए ने खुले आसमान के नीचे बने किया गया |
          बॉम्बे जयश्री ने गायन प्रारंभ करने से पहले  आई.जी.एन.सी.ए का बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया और खुले आसमान के नीचे एम्पीथिएटर में  पीपल के पेड के नीचे बने मंच पर अपनी प्रस्तुति को अपना सौभाग्य बताया।   उन्होंने कहा कि चूँकि इस संगीत संध्या का आयोजन आई.जी.एन.सी.ए द्वारा बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किया जा रहा है तो मैं आज जो भी गाऊँगी वो सारी बंदिशें संस्कृत की होंगी और भगवन बुद्ध को समर्पित होंगी |
        अपनी  3 घंटे की प्रस्तुति में जयश्री ने आदि शंकराचार्य के श्लोकों को विभिन्न शास्त्रीय रागों के माध्यम से प्रस्तुत किया, उन्होंने अपनी प्रस्तुति में राग हंसध्वनी, भैरवी, मांड हमीर एवं कुछ बंदिशें मिश्रित राग में प्रस्तुत की | जयश्री ने भगवन बुद्ध के मूल उपदेश ‘मोक्ष’ पर आधारित आदि शंकराचार्य द्वारा कृत ‘निर्वाण सतक्मं’ “न पुण्यं, न पापं, न सुखं, न दुखं, चिदानंद सदा....” मिश्रित राग में गाया |इसके अलावा उन्होंने ‘सर्वम ब्रह्मं’, कृष्ण पर आधारित भजन ‘अधरं मधुरं’भी गाया
          उनके साथ गायन में चैत्रा सायराम, श्वेता श्रीराम, विजय श्री एवं अभिनय ने साथ निभाया जबकि वाईलिन  में एल. रामकृष्ण, मृदंगम पर  एन.सी. भरद्वा व  खंजीरा पर  हरी शर्मा ने साथ देकर समां बांध दिया।