प्राचीन शिक्षा प्राणाली में था नैतिकता का समावेश : दलाई लामा

नयी दिल्ली । तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा ने आज कहा कि वर्तमान शिक्षा प्राणाली हमें भौतिकवादी समाज की तरफ ले जाती है जबकि भारत की प्राचीन शिक्षा प्राणाली में  भावनाओं और नैतिकता का समावेश था।
धर्म गुरु ने  यहाँ  लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (एलबीएसआईएम) के 22वें दीक्षांत समारोह में 2016-2018 पीजीडीएम पाठ्यक्रम के 270 छात्रों को डिप्लोमा प्रदान करते हुये यह बात कही। समारोह में डिप्लोमा के साथ ही  छात्रों को ललिता शास्त्री  पुरस्कार और  अमित चोपड़ा अवॉर्ड भी दिये गये।
 आध्यत्मिक गुरु  दलाई लामा ने छात्रों को कहा कि   हमें एक ऐसी शिक्षा पण्राली विकसित करनी चाहिये जिसमें भावनायें, प्यार और दूसरों को क्षमा करने की बातें शामिल हों। आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों साथ लेकर चलना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो आधुनिक तकनीक के साथ प्राचीन मान्यताओं को जोड़कर चलता  है। इसीलिए भारत एक महान देश है।
          समारोह में 173 छात्रों को प्रबंधन में दो साल का पूर्णकालिक स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम जनरल), 60 छात्रों को प्रबंधन में दो साल का पूर्णकालिक स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम फाइनेंस), आठ छात्रों को प्रबंधन में तीन वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम पार्ट-टाइम) और सात छात्रों को  प्रबंधन में स्नातकोत्तर एग्जीक्यूटिव   डिप्लोमा से दिया गया।
 समारोह  में मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया जिनमें मे अभिषेक चढा को पीजीडीएम (वित्त) और  प्रशांत राणा को पीजीडीएम (जनरल) में गोल्ड मेडल  से सम्मानित किया गया। अशिता कुकरेजा को पीजीडीएम (एग्जीक्यूटिव) में और दिलप्रीत सिंह को पीजीडीएम में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। युगांश सक्सेना को एलबीएसआईटीएम, इंदौर में अकादमिक उत्कृष्टता के लिए गोल्ड मेडल  से सम्मानित किया गया। इसके ललिता शास्त्री मेमोरियल अवॉर्ड मुस्कान रालन और अमित चोपड़ा पुरस्कार  मुथुरामन को दिया गया।
 लाल बहादुर शास्त्री इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के अध्यक्ष और पूर्व वित्त मंत्री अनिल शास्त्री ने दलाई लामा का विशेष धन्यवाद किया और छात्रों को शुभकामनायें दीं।