स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देशों पर तीन महीने में केन्द्र फैसला करे 
 
 
नयी दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने आज केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि सभी स्कूलों के लिये सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश बनाने की मांग पर तीन महीने के भीतर निर्णय लिया जाये।  शीर्ष अदालत ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्णय के दायरे में  सभी पब्लिक और निजी स्कूल आने चाहिए। गुरूग्राम के एक स्कूल में जान गंवाने वाले सात वर्षीय लड़के के पिता और कुछ वकीलों ने कई याचिाकओं में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। 
  न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन की पीठ ने कहा कि स्कूलों के लिये दिशानिर्देश या नीति तैयार करने के मामले में न्यायालय विशेषज्ञ संस्था नहीं है और उचित होगा कि सरकार विभिन्न याचिकाओं में उठाये गये मुद्दों पर गौर करे।  पीठ ने अपने आदेश में कहा , ‘‘ हम मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश देते हैं कि वह जनहित याचिकाओं में किये गये अनुरोध पर गौर करे और तीन महीने के भीतर इस बारे में फैसला ले। इस संबंध में लिया गया निर्णय पब्लिक और निजी दोनों ही तरह के स्कूलों के लिये होगा। ’’   इससे पहले , शीर्ष अदालत ने केन्द्र और राज्यों द्वारा तैयार किये गये मानकों का संकलन कर उसे विचार के लिये पेश करे। न्यायालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से इन याचिकाओं पर जवाब मांगा था।  इन याचिकाओं पर हरियाणा , कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने जवाब दाखिल किये हैं।   शीर्ष अदालत में महिला अधिवक्ता आभा आर शर्मा और संगीता भारती ने अपनी याचिकाओं में बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं करने वाले उपाय करने और स्कूल जाने वाले बच्चों की संरक्षा के लिये बने दिशानिर्देशों पर सख्ती से अमल का अनुरोध किया है।   याचिकाओं में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के लाइसेंस रद्द करने और सरकारी अनुदान जब्त करने का भी अनुरोध किया गया है।  एक अन्य वकील सुजीता श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में स्कूल परिसर में बच्चों का बार बार शोषण और उनसे अनुचित यौन व्यवहार का मामला उठाया है।