क्या आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को देनी होगी फीस

अप्रैल 2018 से स्कूल की पूरी फीस देने के लिए तैयार रहे ई.डब्ल्यू.एस/डी.जी. श्रेणी के अभिभावक

नई दिल्ली। शिक्षा के मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 की धारा 3 के अनुसार छः से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को एलिमेन्टरी कक्षा (अर्थात कक्षा आठ) तक मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है जिसके अन्तर्गत गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों को अपने विद्यालयों में 25 प्रतिशत बच्चें गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों  को दाखिल करने के अनिवार्य किया गया था। जिसके बदले में मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 की धारा 12(2) के अन्तर्गत राज्य सरकार / स्थानीय सरकार के अपने स्कूल में जो रूपया प्रति बच्चा खर्च होता है या फिर उस स्कूल की जो ट्युशन फीस है जो भी कम होगी वो फीस ऐसे 25 प्रतिशत गरीबी कोटे में दाखिल होने बच्चों की स्कूल को राज्य सरकार देगी।
मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2010 में लागू हुआ था अर्थात जो बच्चा 1.4.2010 को कक्षा एक में ई.डब्ल्यू.एस श्रेणी में  दाखिल हुआ था उसकी 31.03.2018 को एलीमेन्टरी शिक्षा पूरी हो जायेगी। तब इस बच्चे का मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार पब्लिक स्कूलों में समाप्त हो जायेगा इसी तरह     01.04.2010 को नर्सरी कक्षा में दाखिल हुआ उसकी एलिमेन्टरी शिक्षा 31.03.2020 को पूरी हो जायेगी। जो बच्चा के.जी. में दाखिल हुआ है उसका मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार 31.03.2019 को समाप्त हो जायेगा। ऐसे में निजी भूमि पर चलने वाले स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों को सरकार स्पष्ट करे कि आगे ऐसे बच्चों को पब्लिक स्कूलों में पढने के लिए अभिभावक स्वयं फीस अदा करेंगे या दिल्ली सरकार फीस देगी। वहीं दिल्ली विकास प्राधिकरण से प्राप्त जमीन पर चलने वाले स्कूलो को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 के अन्तर्गत इसके लिए 5 प्रतिशत बच्चों का कक्षा 9 में आते ही अधिकार समाप्त हो जायेगा। जिसके लिए ऐसे 5 प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों को फीस अदा करनी पडेगी। ऐसी स्थिति में स्कूलों में झगडे की स्थिति बनेगी क्योंकि अभिभावक तो यह सोचता है कि एक बार नर्सरी/ के.जी.  में दाखिला कराने के बाद उसको तो मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 के अन्तर्गत उच्चतर माध्यमिक स्तर  तक की शिक्षा मुफ्त मिलेगी जबकि राज्य सरकार / स्थानीय निकायों की सरकारों को सिर्फ आठवीं कक्षा तक ही गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों को फीस देने का अधिकार है। जिसको लेकर अभी तक दिल्ली सरकार मौन है। शायद उसे एक अप्रेेल 2018 के बाद स्कूलों में होने वाले हालात का अंदाजा नहीं है। जब कानूनन गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूल कानूनन ई.डब्ल्यू.एस/डी.जी. श्रेणी के बच्चों से फीस लेने का अधिकार हो जाता है। तब अभिभावक व स्कूल प्रबन्धक आमने सामने होंगे झगडे की स्थिति बनेगी आरोप प्रत्यारोप की स्थिति बनेगी। यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि देर सवेर पूरे देश में यह स्थिति बनेगी। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मेनेजमेन्ट एसो. के अध्यक्ष श्री रमेश चन्द जैन ने सरकार से मांग की है कि सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे कि क्या 01.04.2018 से मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून-2009 के अन्तर्गत गरीब श्रेणी में दाखिल होने वाले हजारों बच्चों की फीस सरकार देगी या फिर अभिभावक देंगे।