डिजिटल इंडिया में डिजिटल एजुकेशन से संवरेगा छात्रों का भविष्य
 
  • देश में ई-लर्निग बनेगी  शिक्षा का बड़ा प्लेटपार्म बनाने की कोशिश 
  •  मानव संसाधन मंत्रालय का  ई-लर्निग पर विशेष फोकस
  • तीन वर्ष में ई-लर्निग पर लगभग 300 करोड़
  • ई-लर्निग को बढावा देने के लिये चल रही हैं पांच प्रमुख योजनाएं
  • स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के लिये ई-लर्निग प्लेटफार्म तैयार
 
 
 
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया में डिजिटल एजुकेशन से नई पीढी का भविष्य संवरेगा। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिये मानव संसाधन मंत्रालय भी शिक्षा को डिजिटल बनाने में लगा है। स्कूल स्तरसे लेकर उच्च शिक्षा तक ई-लर्निग के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये  अब तक पांच प्रमुख योजनांएं लांच की जा चुकी है और लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है। मंत्रालय अधिकारियों का मानना है कि ई-लर्निग अगले कुछ वषरै में शिक्षा हासिल करने का बड़ा प्लेटफार्म बन सकता है। 
केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करने में मानव संसाधन मंत्रालय भी पीछे नहीं है। मंत्रालय द्वारा शिक्षा को डिजिटल बनाने के लिये तमाम प्रमुख किताबों को डिजिटल बनाने के साथ साथ ई-लर्निग को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा के डिजिटलीकरण व ई-लनिँग के लिये मंत्रालय द्वारा एसडब्लूएवाईएएम  स्वयम, स्वयम प्रभा, ई-पाठशाला, और शैक्षिक संसाधनों का  डिजिटल कोष आदि योजनाएं चलाई जा रही हैं जिन पर पिछले तीन वर्ष में लगभग 300 करोड़ खर्च भी किये जा चुके हैं। 
इन योजनाओं में सर्वाधिक 176 करोड़ रुपये मानव संसाधन मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना  द स्टडी वैबस आफ एक्टिव लर्निग फॉर यंग एसपाइरिंग माइंड  (स्वयम)। है। इसके माध्यम से ऑन लाइन कोर्स चलाये जा रहे हैं और इसे आन लाइन पाठयक्रमों का बड़ा मंच बनाया जा रहा  है। इसमें सूचना तकनीक का प्रयोग करके कक्षा 9वीं से 12वीं  के अलावा स्नातकोत्तर तक के छात्रों के लिये लगभग 1000 से अधिक कोर्स चलाये जा रहे हैं।  इसी तर्ज पर चलाई जा रही स्वयम प्रभा योजना के तहत डीटीएच के माध्यम से 32 शैक्षिक चैनल चलाये जा रहे हैं जिन पर अलग अलग विषयों पर शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना पर लगभग 63 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।  मंत्रालय के अनुसार किताबों का डिजिटलीकरण करने के लिये बनाई गई राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में अब तक 153 लाख से अधिक किताबें डिजिटल रूप मेंउपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसी तरह की ई-पाठशाला योजन के तहत भी एनसीईआरटी, एससीईआरटी सहित राज्यों के शैक्षिक बोडरे द्वारा विकसित पुस्तकों व शैक्षिक सामग्री को एप के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। 
मंत्रालय के अनुसार ई-लर्निग को लेकर शुरु की गई इन योजनाओं के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं और नई पीढ़ी इसमें रूचि ले रही है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर खुदं भी ई-लर्निग योजनाओं को लेकर उत्साहित है। उनका कहना है कि सरकार का मकसद छात्र छात्राओं को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।