जिंदगी ही है सबसे बड़ा स्कूल: अरुंधति


जम्मू। प्रसिद्ध टेलीविजन एवं थियेटर कलाकार अरुंधति नाग ने आज कहा कि जिंदगी ही एक सबसे बड़ी स्कूल है।
‘सिटी ऑफ टेम्पल्स’के नाम से मशहूर जम्मू में चल रहे आठवें थियेटर ओलंपिक में रंगमंचीय हस्ती गिरीश कर्नाड के‘ बिखरे बिम्ब’के मंचन के सिलसिले में आयी अरुंधति ने मीडिया से बातचीत में इस आशय के उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने कहा,जिंदगी ने ही मुझे बहुत कुछ सिखाया है और यही सबसे बड़ा स्कूल है।
उन्होंने कहा,  मैंने हमेशा वहीं किया है, जो मैं चाहती हूं। मेरी कोई मजबूरी नहीं रही और कह सकती हूं कि मैं उन भाज्ञशाली कलाकारों में से एक हूं , जिन्होंने काम की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं किया। मैंने खुद के जुनून के लिए अपनी जिंदगी के 30 से अधिक साल दिये हैं और अपने सपने का साकार भी किया है।
अरुंधति को 2008 में संगीत नाटक अकादमी, 2010 में पद्मश्री और 57वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी अंतिम सबसे बड़ी फिल्म‘द मेन हू नो इन्फिनिटी‘ थी , जिसमें उन्होंने गणित के जादूगर रामानुजम की माता की भूमिका निभायी थी। उन्होंने हिन्दी फिल्म‘सपने’(1977),‘दिल से’( 1998) और‘पा’(2009) में भी रोल किया था।