राहुल सांस्कृत्यायन: महापंडित इन द लैंड ऑफ़ स्नो

  तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन का शुभारम्भ

 
नई दिल्ली। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में राहुल सांस्कृत्यायन: महापंडित इन द लैंड ऑफ़ स्नो विषय पर आज तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन का शुभारम्भ हुआ | तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में 9 सत्रों के माध्यम से महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन के जीवन, शोधकार्यो, उनके द्वारा संगृहीत पांडुलिपियों व उनकी रोमांचक यात्राओं पर चर्चा होगी |
              इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र परिसर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन आईजीएनसीए ने भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के साथ मिलकर किया है | शुभारम्भ सत्र में राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक श्री प्रीतम सिंह, राहुल सांस्कृत्यायन की पुत्री श्रीमती जया सांस्कृत्यायन, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्  के अध्यक्ष प्रो० एस.आर.भट्ट एवं आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी जी मौजूद थे | 

ईस्ट एशिया प्रोजेक्ट की विभागाध्यक्ष डॉ राधा बनर्जी ने इस तीन दिवसीय सम्मलेन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि “महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट विद्वान थे, उन्हें हिंदी साहित्य और तिब्बत की कठिन और रोमांचक यात्राओं के लिए जाना जाता है, ऐसे विद्वान के ऊपर आईजीएनसीए अपने  ईस्ट एशिया प्रोजेक्ट के तहत तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है जिसमे देश – विदेश के लगभग 90 वरिष्ट शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं |”

 आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने अपने स्वागतीय भाषण में कहा की “राहुल सांस्कृत्यायन जी हिंदी यात्रा वृतांत के पितामह हैं, हिमालयन संस्कृति पर उनकी पकड़ गजब की थी, उनके द्वारा की गई यात्रायें जोखिम भरी व रोमांचक होने के साथ-साथ ज्ञान से परिपूर्ण थी, अपनी इन यात्राओं के दौरान उन्होंने कई दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह और अनुवाद किया, उनकी 13 भाषओं पर पकड़ थी | आईजीएनसीए का सौभाग्य है की आज हम ऐसे व्यक्तित्व पर इस प्रकार का कार्यक्रम कर रहे हैं जिनका भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्तवपूर्ण योगदान रहा | 

डॉ जोशी ने आगे कहा कि “आईजीएनसीए ने पटना संग्रहालय के साथ मिलकर एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया है जिसमे राहुल सांस्कृत्यायन के द्वारा संगृहीत दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया है, जो की 80 साल में पहली बार पटना संग्राहलय से बाहर कहीं प्रदर्शित हो रही हैं |”

राहुल सांस्कृत्यायन की बेटी जया सांस्कृत्यायन ने कहा कि ये बड़े ही सौभग्य की बात है की राहुल जी के 125 वे जन्मवर्ष के समय आईजीएनसीए ने इस प्रकार का आयोजन किया है, यहाँ पर मैं उनके कार्यों के के विषय में बात नही करुँगी लेकिन मैं उनके व्यक्तित्व से परे बात करुँगी, वे मेरे पिता थे और जब वे इस दुनिया को छोड़ कर गये तो मै केवल 10वीं की क्लास में थी, उन्होंने भले ही इस दुनिया को अलविदा कहा हो लेकिन वो अपनी कृतियों, किताबों के माध्यम से सदैव हमारे आस-पास ही रहे | राहुल सांस्कृत्यायन नाम है सम्भावना, उत्साह और जुनून का जिससे कई लोगों ने प्रेरणा ली है और लेते रहेंगे | 

भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष प्रो० एस.आर.भट्ट ने कहा कि हमारे यहाँ विद्वान लोगों को पंडित उपाधि से नवाजा जाता रहा है लेकिन राहुल सांस्कृत्यायन जी को महापंडित की उपाधि प्राप्त है, आज भारत सरकार लुक एशिया, एक्ट एशिया की पालिसी पर काम कर रही हो लेकिन राहुल सांस्कृत्यायन ने बहुत पहले ही इस पालिसी पर काम शुरू कर दिया था | वे बहु भाषी होने के साथ साथ महान शोधार्थी थे।