लाखों बच्चों ने मानव श्रंृखला बनाकर स्कूल बंद न करने की गुहार लगाई
 
दिल्ली में चलने वाले गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च से बन्द करने के दिल्ली सरकार के आदेश के विरूद्ध आज लाखों की संख्या में बच्चों ने अपने स्कूलों के बाहर मानव श्रंृखला बनाकर स्कूलों को बचाने की गुहार लगाई।  बच्चों के हाथों में नारे लिखित तख्तियां थीं जिनमें सरकार स्कूल बना नहीं सकती तो बंद क्यों, पहले स्कूल बनाओ तब बंद करो, गरीबों के स्कूल बंद मत करो आदि नारे लिखे थे।  बच्चों ने 7 फरवरी, 2018 के दिल्ली सरकार के आदेश को वापस लिये जाने की मांग की।  दिल्ली के सभी हिस्सों में इस प्रकार की मानव श्रंृखला बनाई गई।
 
हाथों में नारे लिखी तखती लिए हुए थे।  जिनकी मांग थी की हमारे माता पिता बडे व महंगे स्कूलों की फीस दे नहीं सकते सरकारी स्कूलों में जगह नहीं हम कहां पढ़े ?  सरकारी स्कूलों पर सरकार हजारों करोड़ रूपये खर्च करती है इस आदेश के कारण लगभग 10 लाख बच्चों के स्कूल बन्द हो जायेंगे जिसको दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में दाखिला नहीं दे सकती। दिल्ली सरकार के अपने स्कूलों में एक-एक कक्षा में 150 से ज्यादा बच्चे है। इन बच्चों के स्कूलों को बन्द करने से उत्पन्न स्थिति बड़ी विकट हो जायेगी। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेन्ट एसो. के अध्यक्ष श्री आर.सी.जैन ने उपराज्यपाल, मुख्यमन्त्री दिल्ली, शिक्षा मऩ्त्री दिल्ली, शिक्षा सचिव दिल्ली व शिक्षा निदेशक दिल्ली सरकार को इस संकट से पहले ही अवगत करा दिया था। 
 
दिल्ली सरकार के इस आदेश से लाखों अभिभावकों की दिन रात की नींद उड़ी हुई है क्योंकि सरकारी स्कूलों मंे जगह नहीं जबकि पब्लिक स्कूलों की फीस वह दे नहीं सकते।  नये सिरे से स्कूलों की ड्रेस, जूते-जुराब, कापी-किताबें खरीदने से उनकी कमर टूट जायेगी जिसका बोझ उन अभिभावकों के लिए तो बहुत ही मुस्किल है जिनके लिए एक से ज्यादा बच्चे इन छोटे-छोटे स्कूलों में पढ़ते हैं।  कई अभिभावकों का कहना है कि ये स्कूल कम फीस में सरकारी स्कूलों से बेहतर शिक्षा दे रहे हैं जिनसे हम संतुष्ट हैं।  ड्रीम रोज केमरिज स्कूल की एक शिक्षिका नेे बताया कि उसके पिता नहीं हैं वो आगे बीएड की पढ़ाई कर रही है।  इस स्कूल में पढ़ाने से उसकी स्वयं की पढ़ाई का खर्चा निकल जाता है अगर यह स्कूल बंद हो जाता है तो आगे उसे अपनी पढ़ाई जारी रखना मुस्किल हो जायेगा।  इन गली मौहल्लों में चलने वाले स्कूलों में कम फीस में सरकार से बेहतर शिक्षा दी जाती है जिनसे अभिभावक भी संतुष्ट हैं और बच्चे भी।
 
श्री जैन ने बताया कि 1 अपै्रल 2010 से मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 की धारा 18 व 19 के अनुसार सभी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को कानून लागू होने के तीन वर्ष के अन्तर्गत मान्यता लेनी आवश्यक है अन्यथा उसके बाद स्कूल चलाने पर स्कूल संचालक पर एक लाख रूपये का तुरन्त जुर्माना व प्रतिदिन 10 हजार रूपये का जुर्माना ऐसे स्कूलों को भरना होगा। ये स्कूल बीस-तीस साल से गावों, देहातों, 44 पुनर्वास बस्तियों व ऐसी जगह जहाँ सरकारी स्कूल नहीं है वहाँ पर कम फीस में शिक्षा की जरूरतों को पूरा कर रहे है।
 
श्री जैन ने आम आदमी की बात करने वाली सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जिस कानून में तीन वर्ष में मान्यता लेने का प्रावधान है उसी कानून की धारा 6 में साफ लिखा है कि सरकार 3 वर्ष के अन्दर हर बच्चे के पडौस में नये स्कूल बनाकर उस बच्चे के शिक्षा के अधिकार को पूरा करेगी। क्या सरकार मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 की इस धारा के अनुसार स्कूल नहीं बना पायी। बल्कि 1.4.2010 से लागू हुऐ कानून के बाद दिल्ली में स्कूल नये बनाने की बजाय बन्द ज्यादा हुए हैं। पांच सौ नये स्कूल बनाने का दावा करने वाली सरकार 3000 स्कूलों को बन्द करने का आदेश देकर अपनी गरीब विरोधी नीति को उजागर कर रही है। प्रदर्शनकारियों में करावल नगर, त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, जहाँगीरपुर, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, शीलमपुर, सोनिया विहार, संगम बिहार, नांगलोई, संत नगर बुराड़ी, गीता कालोनी, सन्दर नगरी, नन्द नगरी, गांव भलसवा, गांव सिरसपुर और तुखमीर पुर, मुकन्दपुर, घोंड़ा, विकास नगर, उत्तमनगर आदि पूरी दिल्ली से बसों में आये थे। 
 
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेन्ट एसो. के अध्यक्ष श्री आर.सी.जैन ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि सरकार को चेतावनी दी कि सरकार इन स्कूलों को बन्द करने के निर्णय को तुरन्त प्रभाव से वापिस ले अन्यता यह आंदोलन जनांदोलन का रूप लेकर सरकार को भारी पड़ेगा।