परीक्षा के दौरान कैसे तनाव को भगायें दूर 
 
नई दिल्ली  । कई शहरों में किए गए एक ताजा सव्रेक्षण से यह संकेत मिला है कि लगभग 70 प्रतिशत छात्रों को परीक्षा से पहले के कुछ सप्ताह में सात घंटे की आवश्यक नींद नहीं मिल पाती है। सव्रेक्षण में शामिल हुए 6,500 बच्चों में, लगभग 18 प्रतिशत की नींद प्रतिदिन मात्र तीन से पांच घंटे की ही होती है। हर तीन छात्रों में से दो ने यह संकेत दिया कि उन्हें इतना अधिक होमवर्क और असाइनमेंट मिलते हैं, जितने कि वे कर भी नहीं पाते हैं। परीक्षा के दौरान बच्चों में तनाव का स्तर शिखर पर होता है, क्योंकि बच्चे अपने कमरे में बहुत समय बिताते हैं। इनका खाली समय सोशल मीडिया पर बीतता है। लगभग 34 फीसद छात्रों ने बताया कि कम्प्यूटर और स्मार्ट फोन पर उनका एक से तीन घंटे समय खर्च होता है, जिसमें स्कूली पढ़ाई भी शामिल है, जिसमें 11 फीसद छात्र पांच से सात घंटे के बीच समय ऑनलाइन खर्च करते हैं। विशेषज्ञों की नजर में : हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डा. केके अग्रवाल ने कहा, ‘‘परीक्षा से पहले होने वाली चिंता से शरीर और मन पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे प्रदर्शन खराब होता है। परीक्षा के दौरान तनाव होने से, प्रश्नों को पढ़ना और समझना मुश्किल हो सकता है और यहां तक कि शब्दों और अवधारणाओं को याद करने में दिक्कत हो सकती है। यह जरूरी बातें :एक स्वस्थ आहार, रात की अच्छी नींद, और विश्राम की तकनीक से कार्य प्रदर्शन बेहतर होता है। कभी-कभी, फ्लो चार्ट बनाने से चीजों को बेहतर ढंग से याद रखने में मदद मिल सकती है।कुछ सुझाव : बच्चों की तुलना नहीं की जानी चाहिए : इससे बच्चे में क्रोध या अवसाद हो सकता है। बच्चा जो भी हासिल करे, उसे बिना किसी शर्त के स्वीकार करना चाहिए। झूठे वादे करने से बचना चाहिए, जैसे कि आप प्रथम आओगे तो आपको बाइक मिलेगी। जब वह ऐसा कर लेता है फिर कहते हैं कि आप अभी तक 18 वर्ष के नहीं हो, इसलिए आपको लाइसेंस नहीं मिल सकता। इस बार, एक साइकिल दिला देते हैं, उसके बाद हम बाइक लेंगे। टूटे हुए वादे से बच्चे को चोट पहुंचती है। क्रोध की चेन से बचें। उदाहरण के लिए, पिता ने यदि अपना गुस्सा मां पर उतार दिया (क्योंकि वह वापस जवाब नहीं देती), और वह इसे बच्चे पर उतारती है (उसी कारण की वजह से)। ऐसे में, बच्चा अपना गुस्सा अपनी किताबों या पढ़ाई या छोटे भाई या घर के काम पर उतार सकता है। बच्चे पर अपनी अपेक्षाएं न थोपें। उदाहरण के लिए, आपको केवल डॉक्टर ही बनना है। बच्चे को दो विवादित संदेश देने से बचें, जैसे मां यदि बच्चे को पढ़ने के लिए कहे औरपिता कहें कि - उसे मजबूर मत करो। अपने बच्चे को रोजाना व्यायाम करने को कहें और उसे प्राणायाम व ध्यान भी सिखाएं। संतुलित और पौष्टिक आहार प्रदान करें। लंबे समय तक भूखे रखने से बचें। कैफीन को प्रतिबंधित करें, उसकी जगह पीने के लिए पानी अधिक दें। एकाग्रता, स्मृति और मूड में सुधार के लिए एक उचित कार्यक्रम के साथ पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें। इससे चिड़चिड़ापन भी कम होता है।