एक लाख से ज्यादा स्कूली छात्राओं को छात्रवृत्ति देगा अल्पसंख्यक मंत्रालय


 नयी दिल्ली। अल्पसंख्यक समुदायों की स्कूली छात्राओं की दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लाभार्थियों की संख्या इस वित्त वर्ष में एक लाख से अधिक होगी जो पिछले साल के मुकाबले करीब तीन गुना अधिक है।
     केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ एमएईएफी की ओर से मेधावी स्कूली छात्राओं के लिए बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना चलाई जाती है।  पिछले कई वर्षों से इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा की लडकियों को छात्रवृत्ति दी जाती रही है, लेकिन इस बार योजना के दायरे में नौवीं और 10वीं कक्षा की छात्राओं को भी शामिल किया गया है।
     एमएईएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी नेेभाषो को बताया कि इस वित्त वर्ष में बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति योजना के तहत एक लाख से अधिक बच्चियों को छात्रवृत्ति दिया जाना तय है। अभी लाभार्थियों का एकदम सटीक आंकडा बता पाना संभव नहीं है क्योंकि अभी सारे आवेदनों की छानबीन नहीं हो पाई है। इतना जरूर कह सकता हूं कि काम अंतिम चरण में है और आखिर में लाभार्थियों का आंकडा एक लाख से सवा लाख के बीच रहेगा।
    उन्होंने कहा कि 15 मार्च तक सभीे योग्य उम्मीदवारों के लिए छात्रवृत्ति जारी किए जाने की उम्मीद है।  अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के बजट को बढ-ाकर 70 करोड- रुपए कर दिया है। यह राशि पहले 60 करोड- रुपये थी।
    इस छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वित्त वर्ष में कुल 241,000 से अधिक लडकियों ने आवेदन किया जिनमें 11वीं कक्षा की छात्राओं की संख्या करीब 86,000 है। आवेदन की आखिरी तिथि 15 नवंबर थी। पिछले साल सिर्फ 45,000 लडकियों के आवेदन मिले थे और इनमें से करीब 36,000 को छात्रवृत्ति दी गई।
   बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राओं की छह- छह हजार रुपये मिलते हैं। नौवीं और 10वीं कक्षा की छात्राओं को पांच-पांच हजार रुपये मिलेंगे।  इससे पहले के वर्षों में योजना के तहत हर साल औसतन 50-60 हजार आवेदन आते थे। 
आवेदकों की संख्या बढने के संदर्भ में पूछे जाने पर एमएईएफ के अधिकारी ने कहा कि आवेदनों की संख्या बढ-ने की एक वजह नौवीं और 10वीं कक्षा की छात्राओं को इस योजना में शामिल किया जाना जरूर है, लेकिन सबसे बडी वजह जागरुकता का बढना है। करीब ढाई लाख आवेदनों के आने का सीधा मतलब यह कि इस योजना को लेकर अल्पसंख्यकों में जागरुकता बढी है।