बांसवाडा। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने राज्य के सभी राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालय परिसरों में बाल अधिकारों की जागरूकता के लिए दीवार पर बाल अधिकारों की जानकारी अंकित करने के निर्देश जारी किये हैं।
           श्री डिडेल ने राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुव्रेदी द्वारा की गयी इसकी अनुशंसा के तहत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह आदेश दिये हैं। गौरतलब है कि श्रीमती चतुव्रेदी ने गत 16 जनवरी 2018 को मुख्य सचिव एन.सी. गोयल को इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत करवाया था कि राज्य के विभिन्न जिलों के राजकीय एवं निजी विद्यालयों के निरीक्षण दौरान बाल अधिकारों की जानकारी का अभाव पाया गया। 
       श्रीमती चतुव्रेदी ने बताया कि सभी विद्यालयों में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नम्बर, बाल कल्याण समिति, जिला कलेक्टट्र के नम्बर, थाने पर नियुक्त बाल कल्याण अधिकारी के नम्बर भी अंकित होंगे। यह बच्चों के अधिकारों के संरक्षण एवं शिक्षा के साथ में सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में सार्थक कदम है। राज्य के समस्त विद्यालयों में दीवारों पर लैगिग अपराधों, किशोर न्याय, नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार, बालश्रम निषेध, बाल विवाह अधिनियम, चाइल्ड हेल्प लाइन की विस्तृत जानकारी भी रहेगी।
         इस संबंध में लैंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की जानकारी में 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के बालक बालिकाओं के साथ होने वाली यौन हिंसा की शिकायत पर आयोग की भूमिका के साथ अधिनियम किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अंतर्गत, 16 से 18 वर्ष तक के बालकों जघन्य अपराध करने की स्थिति में उन पर वयस्क के समान अभियोग चलाने की अनुमति प्रदान करता है, इनमें सम्बन्धित प्रकरणों की जाँच, निस्तारण उनकी देखभाल, संरक्षण, पुन: सामाजिक एकीकरण एवं पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा किशोर न्याय बोर्ड का गठन करवाने संबंधित जानकारी होगी।
       नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार,अधिनियम 2009 के अंतर्गत छह से 14 वर्ष तक की आयु के बालक-बालिकाओं को प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक अपने आस-पास के विधालयों में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार के साथ बाल श्रम (निषेध व नियम) अधिनियम 1986 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को किसी कारखाना,खान या अन्य किसी खतरनाक व्यवसाय पर काम करवाने पर दंडनीय अपराध की जानकारी भी होगी।
       उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह के खिलाफ माता-पिता संरक्षक, बाल विवाह संचालित करवाने वाले पंडित सहित जो बाल विवाह में सम्मिलित होने वाले आरोपी है जिसकी जानकारी के साथ चाइल्ड हेल्प लाइन (1098) केंद्र सरकार की और से 24 घंटे चलाई जाने वाली चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 की नि:शुल्क सेवा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अत्याचार, उत्पीडन, शोषण, यौन, ¨हसा आदि की शिकायत की जा सकती है। यह भी दीवार पर अंकित होगा।