एनएमसी विधेयक में ब्रिज कोर्स का प्रावधान डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए : सरकार

 पायल बनर्जी
नयी दिल्ली।  आयुष डाक्टरों को एलोपैथ प्रैक्टिस की अनुमति देने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में ब्रिज कोर्स का प्रावधान देश में चिकित्सकों की ‘‘जबरदस्त कमी’’ को पाटने के लिए किया गया है । 
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर विधेयक के बारे में सवाल करने के लिए अलग से खंड बनाया है। इस कदम का मकसद विभिन्न प्रावधानों को लेकर चिकित्सीय भाईचारे की चिंताओं का निदान करना है। विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजा गया है, क्योंकि चिकित्सा पेशे से जुडे लोगों ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों को लेकर तीखा विरोध किया था। मंत्रालय ने यह भी आश्वस्त किया है कि ब्रिज कोर्स अवैज्ञानिक और खतरनाक नहीं होगा।  ब्रिज कोर्स के अवैज्ञानिक और खतरनाक होने के सवाल पर मंत्रालय ने कहा कि एनएमसी में एलोपैथी डॉक्टरों का प्रभुत्व रहेगा। वाजिब विचार-विमर्श के बाद अगर वे सर्वसम्मति से ब्रिज कोर्स को मंजूरी देते हैं तो ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि यह अवैज्ञानिक और खतरनाक होगा। मंत्रालय ने कहा कि इस पाठ्यक्रम को इस तरह से बनाया जाएगा कि यह अन्य डॉक्टरों को जिम्मेदारी के साथ सीमित दवाइयां देने में ही समक्ष बनाए।  एनएमसी विधेयक का मकसद स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की कमी को पाटना है। इसके लिए प्रशिक्षित आयुष डॉक्टरों को ब्रिज कोर्स के जरिए एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की निवारक और उसे बढावा देने वाले उनके कौशल को निखारना है।  स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में शहरों में रहने वाले डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में काम नहीं करना चाहते हैं।
साभार भाषा