स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बदलेगी तस्वीर

शिक्षा के बजट में लगभग 10 प्रतिशत की हुई वृद्धि 
शिक्षा की गुणवत्ता के लिये हुआ महत्वपूर्ण योजनाओं का एलान
छात्रों को मिलेंगे उच्च शिक्षा के अधिक अवसर
पिछले वर्ष की तुलना में शिक्षा को मिले पांच हजार करोड़ रुपये अधिक 
आदिवासी क्षेत्रों में खुलेंगे एकलव्य मॉडल स्कूल
प्रतिभाशाली छात्रों को मिलेगा अनुसंधान का मौका
18 नए स्कूल ऑफ प्लांिनग ऐंड आर्किटेक्चर होंगे स्थापित 
अनुसंधान के लिये ‘रीवाइटेलाइंिजग इन्फास्ट्रचर ऐंड सिस्टम्स इन एजुकेशन  आरआईएसईी’ की शुरुआत का एलान
अनुसंधान पर चार वर्ष में खर्च होंगे एक लाख करोड़
शिक्षा के लिये एक प्रतिशत सेस में वृद्धि

 

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आयेगा। जेटली ने शिक्षा के लिये बजट में जहां 10 प्रतिशत की वृद्धि की है वहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व अनुसंधान के लिये नई योजनाओं का एलान किया है। बजट में शिक्षा के लिए एक प्रतिशत सेस में वृद्धि कर उन्होंने शिक्षा के लिये धन का पर्याप्त इंतजाम किया है ताकि धन की कमी के कारण शिक्षा के क्षेत्र में कोई समझौता ना हो। जिस तरह का बजट जेटली ने पेश किया है उससे आगामी वर्ष में शिक्षा की तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। 
    देश में शिक्षा के विकास की दृष्टि से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट में स्कूली शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ साथ उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा व अनुसंधान पर भी विशेष जोर दिया है। उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा की तुलना में जेटली ने स्कूली शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। स्कूली शिक्षा के लिये वर्ष 2017-18 के 47006 करोड़ की तुलना में इस वर्ष 50 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जबकि उच्च शिक्षा के लिये वर्ष 2018-19 के 33329 करोड़ की तुलना में 35010 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस प्रकार शिक्षा पर कुल लगभग 85 हजार करोड़ रुपये का आवंटन इस वर्ष के लिये किया गया है। 
    शिक्षा के लिये दिये गये बजट की विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा के लिये रखे गये 50 हजार करोड़ में से 42391 करोड़ रुपये योजनागत खर्च के लिये हैं और मात्र 7609 करोड़ ही गैर योजनागत के लिये हैं। योजना व्यय में 3410 करोड़ की बढ़ोत्तरी तथा गैर योजना व्यय में 233.36 करोड़ की बढ़ोत्तरी बताती है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी ढांचागत सुधार पर ज्यादा जोर देगी।  केन्द्रीय विद्यालयों के बजट में 125 करोड़ तथा नवोदय विद्यालयों के लिये 93 करोड़ की बढ़ोत्तरी से भी स्पष्ट है कि सरकार स्कूली शिक्षा पर विशेष ध्यान देगी। स्कूली शिक्षा की एक बड़ी विशेषता अध्यापकों को प्रशिक्षण योजना को मजबूत बनाना है, साथ ही भाषा अध्यापकों को भी फिर से नियुक्त करने का एलान किया गया है। 
    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान के लिये ‘रीवाइटेलाइंिजग इन्फास्ट्रचर ऐंड सिस्टम्स इन एजुकेशन  आरआईएसईी’ की शुरुआत एक बड़ी पहल है इस पर चार वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये निवेश किये जायेंगे। देश की विभिन्न आईआईटी व एनआईटी में 18 नए स्कूल ऑफ प्लांिनग ऐंड आर्किटेक्चर स्थापित करने का एलान करने के साथ साथ केन्द्रीय संस्थाओं में ढांचागत विकास के लिये 21 हजार करोड़ रुपये उपलबध होंगे। छात्रों को उच्च शिक्षा में ऋण के लिये सरकार ने 2150 करोड़ रुपये  ब्याज सब्सिडी योजना हेतु आवंटित किये हैं। प्रतिभाशाली छात्रों को बढ़ावा देने के लिये 340 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति हेतु रखे गये हैं जबकि नई आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, आईआईआईटी, आईआईएसईआर के लिये 255 करोड़ का आवंटन किये जाने से यह स्पष्ट है कि भविष्य में उच्च शिक्षा के लिये अधिक अवसर प्राप्त होंगे।