इण्डस्ट्रियल व अकादमिक समन्वय से बनेगा मेक इन इंडिया
 
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रिसर्च व इनोवेशन को दिया जायेगा बढ़ावा
मद्रास आईआईटी रिसर्च पार्क के परिणाम से सरकार उत्साहित
 
 
चेन्नई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने के लिये इण्डस्ट्रियल व अकादमिक समन्वय को बढावा दिया जायेगा। इस दिशा में आईआईटी मद्रास द्वारा की गई पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क में विभिन्न कंपनियों द्वारा आईआईटी छात्रों व फेकेल्टी के सहयोग से किये गये नये अन्वेष्णों से सरकार भी उत्साहित है। इन परिणामों के बाद सरकार ने इण्डस्ट्रीयल अकादमिक समन्वय की पहल को गति देने का निर्णय लिया है। 
        देश की समस्याओं का समाधान देश में ही ढूंढने तथा आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेश में ही उत्पादन को बढावा देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया मिशन शुरु किया था। सरकार के इसी मिशन के तहत ही मानव संसाधन मंत्रालय ने देश के लगभग आधा दर्जन आईआईटी में रिसर्च पार्क बनाने की योजना बनाई थी। इस योजना के  तहत ही मद्रास आईआईटी द्वारा लगभग 475 करोड की लागत से रिसर्च पार्क का निर्माण लगभग 8 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में रिसर्च पार्क का निर्माण किया गया है और इस रिसर्च पार्क के अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आये है। 
मद्रास आईआईटी पार्क में ना केवल देश विदेश की जानी मानी कंपनियां छात्र छात्राओं के साथ मिलकर नये नये अन्वेषण कर रही हैं। आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क में लगभग 138 कंपनियों के अलावा लगभग 50 से अधिक स्टार्टअप कंपनियां वहां के स्नातकों तथा छात्रों के साथ मिलकर काम कर रही है। 
      सरकार के लिये सकारात्मक स्थिति यह है कि सरकार ने केवल ढांचागत सुविधाओं व भवन निर्माण आदि के लिये लगभग 100 करोड रुपये का निवेश किया है, बाकी निवेश कंपनियां अपनी ओर से कर रही हैं। यही नहीं इन कंपनियों ने अपने अन्वेष्णों के बाद जो उत्पाद बाजार में उतारे हैं उससे वर्ष 2016—17 में ही लगभग 133 करोड का राजस्व भी मिल रहा है। आईआईटीएम रिसर्च पार्क के फैकल्टी इंचार्ज प्रोफेसर अशोक झुनझुन वाला बताते हैं कि इस पहल से 2500 रोजगार के नये अवसर भी उत्पन्न हुए है।
      मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बृहस्पतिवार को स्वयं आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क का दौरा कर वहां विभिन्न कंपनियों व छात्रों द्वारा किये जा रहे शोध कार्यो, नये अन्वेशणों तथा बाजार में उतारे गये नये उत्पादों का जायजा लिया। रिसर्च पार्क में इण्डस्ट्रीय अकादमिक सहभागिता के परिणाम देखकर जावडेकर भी उत्साहित थे। उन्होंने कहा कि इण्डस्ट्रीयल व अकादमिक सहयोग को बढाने की जरूरत है ताकि देश के उद्यमी, फैकल्टी व छ़ात्र मिलकर देश की समस्याओं के समाधान से संबधित अन्वेशण करें और देश को एक नया बाजार उपलब्ध करायें।