• केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक में दूसरे दिन हुई उच्च शिक्षा पर चर्चा
  • नामांकन बढ़ाने के लिये खोले जायेंगे नये कालेज व विविद्यालय
  • सभी राज्यों में क्षेत्रीय असमानता को किया जायेगा दूर
  • राज्य बनायेंगे अपने अपने स्तर पर योजना 
  • काई छात्र गरीबी के कारण नहीं होगा शिक्षा से वंचित 
 
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अगले पांच वर्ष में औसत नामांकन दल को मौजूदा 25.2 प्रतिशत से 30 प्रतिशत किया जायेगा। उच्च शिक्षा को लेकर राज्यों में उत्पन्न मौजूदा क्षेत्रीय असमानता को भी दूर किया जायेगा तथा जहां जरूरी होगा वहां अधिक से अधिक कालेज व विविद्यालय खोले जायेंगे। सभी राज्य इस संबध में योजना बनाकर सरकार को देंगे। कोई भी छात्र धन के अभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। 
केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड की आज हुई 65वीं बैठक के दूसरे दिन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नामांकन दर बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि बैठक में सभी राज्यों ने आम सहमति से प्रस्ताव पारित का यह निर्णय लिया है कि अधिक से अधिक विविद्यालयों, महाविद्यालयों को खोलकर, और अधिक उत्पादक रूप से बुनियादी सुविधाओं का उपयोग करके उच्च शिक्षा में नामाकन दर को बढ़ाया जायेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसी राज्य में ज्यादा कालेज तथा किसी में कम हैं, ये क्षेत्रीय असमानता दूर की जायेगी और सभी राज्य इसके लिये योजना तैयार करेंगे। 
उन्होंने बताया कि बैठक में यह तय किया गया है कि किसी भी छात्र को साधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता गुणवत्ता में सुधार, संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने और प्रशासन में सुधार के लिए डिजिटल पहल को पेश करने, गुणवत्ता और विकल्प बढ़ाने का भी सभी ने आम सहमति से निर्णय लिया है। यह तय किया गया है कि भारत को  एक भारत, उन्नत भारत, स्वच्छ भारत तथा उत्कृष्ट भारत बनाने के साथ साथ  स्मार्ट और ग्रीन कैंपस बनाये जायेंगे। 
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के लिये शिक्षा कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है। किस राज्य में किस दल की सरकार है यह महत्वपूर्ण नहीं है, सभी राज्यों के लिये शिक्षा के क्षेत्र में समान रूप से काम किये जायेंगे।  उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में मुख्य रूप से अधिक से अधिक शोध स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार को बढ़ावा देने की कमी है जिसे बदला जा रहा है। बैठक में  संस्कृति  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा.महेश शर्मा तथा मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डा.सत्यपाल सिंह भी मौजूद थे।