• आनलाइन लर्निग से डिग्री,डिप्लोमा के लिये जल्द लागू होंगे दिशा निर्देश
  • केवल ए श्रेणी के विविद्यालयों व संस्थानों को ही होगा ई-लर्निग से शिक्षा देने का अधिकार
  • आनलाइन लैक्चर, आनलाइन टयूटोरियल तथा आनलाइन डिस्कशन फोरम से दी जायेगी आनलाइन शिक्षा 
  • केवल गैर तकनीकी कोर्सो के लिये दी जायेगी आनलाइन शिक्षा 
 
नई दिल्ली। विश्व के प्रमुख व विकसित देशों की तरह अब भारत में भी छात्र छात्राएं किसी कालेज व विविद्यालय से हजारों किलोमीटर दूर आनलाइन शिक्षा हासिल कर डिग्री, सर्टीफिकेट व डिप्लोमा ले सकेंगे। सरकार ने इस संबध में नियम बना लिये हैं और जल्द ही दिशा निर्देश जारी कर दिये जायेंगे। 
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि आन लाइन लर्निग देने के लिये बनाये गये स्वयम पोर्टल के अत्यंत उत्साहजनक परिणाम सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि स्वयंम को पिछली 9 जुलाई को लांच किया गया था और अब तक 60 कोर्स स्ययंम के माध्यम से पढ़ाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आनलाइन लर्निग को विविद्यालय स्तर से मान्य बनाने के लिये सरकार अन्य देशो की तर्ज पर एक बड़ी पहल करने जा रही है जिसमें ए श्रेणी के विविद्यालयों व संस्थानों को अपने संस्थान से ही आनलाइन शिक्षा देने का अधिकार दिया जायेगा। 
उन्होंने बताया कि इस प्राणाली में ए श्रेणी के विविद्यालयों व संस्थानों को आनलाइन लैक्चर, आनलाइन टयूटोरियल तथा आनलाइन डिस्कशन फोरम का तकनीकी ढांचा बनाना होगा। आनलाइन शिक्षा के बाद जीआरई की तर्ज पर आनलाइन ही परीक्षा ली जायेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आनलाइन शिक्षा केवल गैर तकनीकी कोसरे में ही उपलब्ध कराई जा सकेगी। तकनीकी कोसरे के लिये आनलाइन शिक्षा मान्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आनलाइन शिक्षा शुरु होने के बाद छात्र छात्राओं के सामने आनलाइन शिक्षा का भी एक विकल्प मौजूद होगा। 
जावडेकर ने बताया कि इस संबध में सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है और जल्द ही इस संबध में सरकार दिशा निर्देश व नियम जारी करेगी। उन्होंने बताया कि किसी भी संस्थान को आनलाइन शिक्षा शुरु करने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा।