देश में मेडिकल सीटों की मौजूदा संख्या नाकाफी: राष्ट्रपति

 नयी दिल्ली।  देश में मेडिकल शिक्षा की सीटों की ‘‘बेहद अपर्याप्त’’ संख्या पर गंभीर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोंविंद ने आज कहा कि वृद्धि को रोकने वाले कई नियामक बाधाओं से पार पाना होगा। 
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थार्न एम्स के 45वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कोंविंद ने एक अच्छी स्वास्थ्य देखभाल प्राणाली और देश की आबादी के बीच के ‘‘अंतर’’ पर विस्तार से अपनी बात कही।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की निर्धारित संख्या के अभाव में मौजूदा डॉक्टरों पर काम का बोझ ‘‘काफी ज्यादा’’ है और इस हालात से तत्काल निपटने की जरूरत है। देश में कार्यरत डॉक्टरों पर काम के बोझ पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं तो कहूंगा कि यह अत्यंत अधिक है।’’ 
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि मैं अपने डॉक्टरों के काबिल कंधों पर बडी जिम्मेदारी दे रहा हूं। मैं मानता हूं कि हमारे डॉक्टरों को मदद की जरूरत है। उन्हें और ज्यादा सहकर्मियों के रूप में मदद की जरूरत है और यहीं पर हमें एक नई नियामक प्राणाली की जरूरत है ताकि हमारे समाज में डॉक्टरों और मेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ सके।’’ 

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार या निजी संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे मेडिकल कॉलेजों में अभी स्नातक की 67,000 सीटें और परास्नातक की 31,000 सीटें हैं। उन्होंने कहा, ‘‘1.3 अरब लोगों के देश में यह बहुत अपर्याप्त है।’’ उन्होंने कहा कि देश को ऐसे ‘नियामक अवरोधों’ एवं ‘हित समूहों’ से पार पाना होगा, जिन्होंने एक गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा की वृद्धि रोक रखी है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इससे हमें हर साल हमारे लोगों की जरूरत से बहुत कम मेडिकल स्नातक और परास्नातक मिलते हैं। इससे कई मेडिकल छात्र दूसरे देशों के कॉलेजों में दाखिला लेने को मजबूर होते हैं, सिर्फ इसलिए क्यों अपने देश में विकल्प कम हैं। हमें इस हालात से तत्काल निपटने की जरूरत है। हमें उन युवाओं के लिए और अवसर पैदा करने की जरूरत है, जिन्होंने चिकित्सा को अपना करियर बनाने का फैसला किया है।’’