अदभुत : दिल्ली में देखें अजंता की गुफाएं

नई दिल्ली। आपने अजंता की गुफाओं के बारे में तो सुना ही होगा, यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित अजंता गुफाओं की चित्रकारी भारतीय संस्कृति का अमूल्य खजाना है | शायद कई बार आपका घुम्कड़मन आपको वहां जाने को कहता होगा लेकिन हर बार किसी न किसी कारण आप मन मारकर बैठ जाते होंगे | अगर आप दिल्ली में हैं तो इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आई.जी.एन.सी.ए) आपको अजन्ता की गुफाओं से रूबर होने का मौका दिल्ली में ही दे रहा है | 
जिन लोगों ने पहले कभी अजंता की गुफा नहीं देखी है उनके लिए इस प्रदर्शनी में अजंता की गुफाओं को स्केल मॉडल के द्वारा दिखने का प्रयास किया गया है , साथ ही अजंता से एक पेंटिंग की एक 72 फीट लंबी तस्वीर इस प्रदर्शनी को आकर्षक बनाती है | 
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी ने इस प्रदर्शनी के बारे जानकारी देते हुए कहा कि “अजंता गुफाओं के बारे में अपने शोध और शैक्षिक गतिविधियों की कड़ी में आई.जी.एन.सी.ए  ने ‘ग्लोरियस अजन्ता – रिसर्च एंड रेस्टोरेशन एग्सिबिशन’ का आयोजन किया है जिसमें आईजीएनसीए ने प्रसाद पवार फाउंडेशन के सहयोग से अपनी ट्विन आर्ट गैलरी में में श्री प्रसाद पवार द्वारा खिंची गयी अद्भुत तस्वीरों, पेंटिंग और कुछ मॉडल के द्वारा अजंता को दर्शकों के लिये प्रस्तुत किया है | यह प्रदर्शनी दर्शकों के लिए 22 जनवरी तक खुली रहेगी |” 
श्री जोशी जी आगे कहते हैं कि “आज जब हम अजंता की पेंटिंग्स को देखते हैं तो हम उन महान चित्रकारों के आगे नतमस्तक हो जाते हैं जिन्होंने ये चित्र बनाये, ये दुर्भाग्य की बात है की हम उन महान चित्रकारों का नाम नही जानते, इन महान चित्रकारों ने कभी अपने नाम की चिंता नही की वे केवल रचनात्मकता लिए चिंतित रहे, वो जानते थे की ये चित्र युगों तक संरक्षित रहेंगे फिर भी उन्होंने कभी अपना नाम चित्रों के साथ अंकित नही किया | आज जब हम अजंता के चित्रों के बारे में सोचते हैं तो हमें आश्चर्य होता है की वो महान चित्रकार कौन रहेंगे होंगे जिन्होंने इन चित्रों को बनाया होगा, इसलिए हमे हमेशा उन अज्ञात मगर महान कलाकारों का व उनकी उच्च स्तर की रचनात्मकता का सम्मान करते रहना चाहिए |” 
फ़ोटोग्राफर प्रसाद पंवार के अनुसार “2000 वर्ष पहले अजंता की दीवारों पर जातक कथाओं के माध्यम से भगवान बुद्ध के पुनर्जन्म की कहानियां का चित्रण किया गया था जो आज भी भगवान बुद्ध के शांति संदेश के साथ विश्व को प्रबुद्ध कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ-साथ अजान्ता की चित्रकला शैली अंधेरे में लुप्त होती जा रही है; प्रसाद पंवार फाउंडेशन का एक मात्र लक्ष्य अजंता की भव्यता को पुनः स्थापित करके उसे भविष्य की पीढ़ी के लिए संरक्षित रखना है।