• अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैण्ड, नाव्रे व इजराइल के साथ शुरु हुई शैक्षिक गतिविधियां
  • उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर 
 
 
 
नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये सरकार ने प्रमुख विकसित देशों के साथ अनुसंधान व शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जायेगा। अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैण्ड, नाव्रे व इजराइल आदि देशों के साथ जहां इस तरह की गतिविधियां शुरु की जा चुकी हैं वहीं  अन्य देशों के साथ भी शिक्षा के क्षेत्र में साझा अनुसंधान व शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने पर विचार किया जा रहा है। 
भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की पहचान व विसनीयता बनाने के लिये केन्द्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से कई गंभीर प्रयास शुरु हुए हैं। इन्हीं प्रयासों की कड़ी में मानव संसाधन मंत्रालय अब वि में अपनी विशेष पहचान रखने वाले संस्थानों के साथ भारतीय संस्थानों के साझा अनुसंधान कार्यक्रम चलाने पर विचार कर रहा है। हालांकि कुछ देशों के साथ इस तरह की शुरुआत की जा चुकी है लेकिन मंत्रालय अब इसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना चाहता है। मंत्रालय के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैण्ड, नाव्रे व इजराइल आदि देशों के साथ अनुसंधान व शैक्षणिक गतिविधियों की दिशा में काम शुरु हो चुका है। अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त अंतर विविद्यालय केन्द्रों की स्थापना की शुरुआत भी इस दिशा में एक कदम है। 
मंत्रालय के अनुसार आईआईटी संस्थानों में नये अनुसंधानों को प्रोत्साहित करने के लिये जहां उद्योगों के साथ आपसी समन्वय कर अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत बनाया जा रहा है वहीं ऐसे क्षेत्रों की भी पहचान की जा रही है जहां वैज्ञानिक अनुसंधान की जरुरत है। मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार इसके लिये सरकार आर्थिक मदद भी दे रही है और प्रमुख आईआईटी संस्थानों में रिसर्च पाकरे की स्थापना की शुरुआत करना इस दिशा में एक बड़ी पहल है। उन्होंने बताया कि आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी कानपुर, आईआईटी हैदराबाद और आईआईएससी बैंगलोर में पांच नए रिसर्च पार्क के निर्माण को सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है, इनमें से प्रत्येक पार्क पर 75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा आईआईटी मुंबई और आईआईटी खड़गपुर में दो पहले से  स्वीकृत अनुसंधान पार्कों को 100 करोड़ रूपये की लागत से जारी रखने के लिए स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है । 
उन्होंने बताया कि तकनीकी संस्थानों के अलावा अन्य कालेजों व इंस्टीटयुट आदि में भी दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये शुरु किये गये गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत संस्थानों में कार्यरत प्राध्यापकों की विशेषज्ञता व क्षमताओं को बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों में विस्तरीय शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिये व्यापक योजना बनाई गई है जिस पर काम चल रही है।