ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने हिंदी, बांग्ला में रखा कदम

        नयी दिल्ली। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) पहली बार हिंदी और बांग्ला में रचनाएं प्रकाशित कर रही है और भारतीय भाषाओं में लेखन के लिए लेखकों विशेषकर युवाओं को जोड़ने पर ध्यान दे रही है।
       यह अकादमिक प्रेस भारत में हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के बड़े पाठक वर्ग को ध्यान में रखते हुए भारतीय भाषा प्रकाशन कार्यक्र म (आईएलपीपी) शुरू कर रही है जिसके तहत सबसे पहले दो भाषाओं, हिंदी और बांग्ला में प्रकाशन और अनुवाद कार्य प्रारंभ किया गया है। कुछ साल के बाद अन्य भारतीय भाषाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा। 
        ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के निदेशक डॉ सुगत घोष ने बताया कि इससे पहले तक नॉन-फिक्शन और अकादमिक कायरे में केवल अंग्रेजी में प्रकाशन होने की वजह से एक बड़ा वर्ग हमसे दूर था और हमें लगता है कि छोटे केंद्रों में पाठकों को उनकी भाषा में गुणवत्तापरक विषयवस्तु पढ़ने को मिलनी चाहिए। हमें लगता है कि यह काम हमें पहले शुरू कर देना चाहिए था।
        घोष ने  भाषा  से बातचीत में कहा कि इस कार्यक्र म के तहत प्रकाशित हिंदी की पहली छह और बांग्ला की आठ पुस्तकों के साथ दिल्ली में चल रहे वि पुस्तक मेले से शुरूआत हो रही है और देशभर में छोटे छोटे पुस्तक मेलों के जरिये भी हम पाठकों से संपर्क बढ़ाएंगे।
      उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हम नये लेखकों से भी संपर्क साध रहे हैं।
      घोष के अनुसार हम रोमिला थापर, आशुतोष वार्ष्णोय, आंद्रे बेते, रामचंद्र गुहा, माधव गाडगिल और माधव खोसला जैसे लेखकों की प्रसिद्ध किताबों का तो हिंदी में अनुवाद कर ही रहे हैं, साथ ही नान-फिक्शन और अकादमिक क्षेत्र में भारतीय भाषाओं में लेखन के लिए खासतौर पर युवा लेखकों से संपर्क कर रहे हैं।  
      उन्होंने कहा,   हमने अंग्रेजी में भी यह प्रयास किया और अब हिंदी और बांग्ला भाषाओं में भी युवाओं को आकषिर्त करने का प्रयास कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि वे हमारे लिए लिखें और हम उनके पहले या दूसरे लेखन कार्य पर प्रयास और निवेश करें। उन पर भरोसा करके काम किया जाए तो दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं। घोष ने कहा कि इस तरह हमें विास है कि हम शानदार लेखकों और समृद्ध पाठकों के बीच सेतु बनाएंगे।
     उन्होंने बताया कि हिंदी और बांग्ला में परियोजना की शुरूआत के बाद तीन चार साल में और भारतीय भाषाओं में भी काम करेंगे।
      उन्होंने कहा कि इस काम के लिए हम पिछले करीब दो साल से तैयारी कर रहे थे और पूरा अनुसंधान और अध्ययन किया गया है।  घोष ने दावा किया कि उनके यहां से पुस्तकों का प्रकाशन गुणवत्ता को परखने की पूरी प्रक्रि या के बाद ही किया जाता है और हिंदी एवं अन्य भाषाओं में भी एक मानक स्तर बनाकर रखा जाएगा जिसमें विशेषज्ञ समीक्षा करेंगे।
        इसके साथ ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस साल के पहले अंग्रेजी शब्द की तरह पहली बार साल के पहले लोकप्रिय हिंदी शब्द की घोषणा आगामी जयपुर साहित्य महोत्सव में करेगी।
       घोष के मुताबिक इसे लेकर एक पैनल काम कर रहा है और हजारों शब्दों में से एक लोकप्रिय हिंदी शब्द चुनने का चुनौतीपूर्ण काम किया जा रहा है। इस काम को लेकर बहुत उत्साह है और विभिन्न प्रकार के गजब के शब्द इस स्पर्धा के लिए आए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन और अन्य देशों से भी हिंदी प्रेमियों ने अपनी प्रविष्टि भेजने में रचि दिखाई।
साभार भाषा